यूएन में भारत की दो-टूक: सीमा पार आतंकवाद का जवाब देने को तैयार, पाकिस्तान को फिर दिखाया आईना

India's Blunt Message at the UN: Ready to Respond to Cross-Border Terrorism; Holds Up a Mirror to Pakistan Once Again

भारत ने वैश्विक मंच से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वह सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा के लिए मजबूत कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। भारत ने पाकिस्तान को आगाह किया है कि आतंक को पनाह देने और उसे प्रायोजित करने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों को बनाए रखने पर आयोजित एक बहस के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए भारत पर अनर्गल आरोप लगाए थे। अहमद ने दावा किया कि आठ दशकों से कश्मीर विवाद अनसुलझा है और इसके लिए भारत जिम्मेदार है। पाकिस्तानी दुष्प्रचार पर तीखा प्रहार करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा भारत को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ हर जरूरी कार्रवाई करने और खुद का बचाव करने का पूरा अधिकार है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद और धार्मिक उग्रवाद का इस्तेमाल उसकी भारत विरोधी मानसिकता और खोखले बयानों को पूरी दुनिया के सामने उजागर करता है। पाकिस्तानी प्रतिनिधि को इतिहास का आईना दिखाते हुए भारतीय राजनयिक ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया।  जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग बन चुका है। यह भारत के साथ उसके पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय के परिणामस्वरूप हुआ है, जिसे बदला नहीं जा सकता। भारत ने सुरक्षा परिषद को याद दिलाया कि संप्रभुता के उल्लंघन की शुरुआत हमेशा पाकिस्तान की तरफ से हुई है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई युद्ध छेड़े और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दिया। सैनिक वापसी में नाकाम: सुरक्षा परिषद का 21 अप्रैल, 1948 का 'प्रस्ताव 47' साफ तौर पर पाकिस्तान को कश्मीर से अपने सैनिकों को वापस बुलाने का आदेश देता है। पाकिस्तान ने आज तक इस अंतरराष्ट्रीय मांग और प्रस्ताव का पालन नहीं किया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह पाकिस्तान के इस पुराने 'कश्मीर जुनून' को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता और देश की सुरक्षा व संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।