दिल्ली में हाई-वोल्टेज राजनीतिक हलचल: 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर की मेगा रैली से पहले पुलिस मुख्यालय पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह और सीएम रेखा गुप्ता
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के आक्रामक तेवरों के बीच सुरक्षा तंत्र पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को अचानक दिल्ली पुलिस मुख्यालय का दौरा किया, जहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहन मंथन किया। इस उच्चस्तरीय बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी विशेष रूप से पुलिस मुख्यालय पहुंचीं।
राजधानी दिल्ली में एक नवंबर को प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। हालांकि, बैठक में किन बिंदुओं पर विशेष रूप से चर्चा हुई और रैली के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अमित शाह और रेखा गुप्ता का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दल और छात्र संगठन निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को इसी विरोध अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दलों ने एक नवंबर को संयुक्त रैली आयोजित करने की घोषणा की है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर के मुताबिक, रैली का निर्णय गठबंधन के घटक दलों से बातचीत के बाद लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। माथेर ने कहा कि यह केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि इंडिया ब्लॉक की संयुक्त रैली होगी। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष एसआईआर के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और आगे भी अपने कार्यक्रम जारी रखेगा। उनके अनुसार, रैली के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा का संदेश दिया जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी रैली को विपक्षी एकजुटता का संदेश देने वाला कार्यक्रम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर कथित तौर पर 'वोट चोरी' की है। वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर देशभर में आंदोलन करेगा और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। गौरतलब है कि वेणुगोपाल ने पांच अक्टूबर को ही एक नवंबर को रैली आयोजित करने की घोषणा की थी। विपक्ष का कहना है कि यह अभियान लोकतंत्र की रक्षा और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों के विरोध के लिए चलाया जा रहा है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को देखते हुए राजधानी की कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। अमित शाह की पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से अब तक किसी विशेष सुरक्षा योजना या यातायात परिवर्तन का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। एक नवंबर को होने वाली रैली में विपक्षी दलों की भागीदारी, एसआईआर पर उठाए जाने वाले सवाल और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दे रहेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन के सामने शांतिपूर्ण आयोजन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों की आवाजाही सुचारु रखने की चुनौती होगी। अब सभी की नजरें रैली की तैयारियों और दिल्ली पुलिस की ओर से किए जाने वाले सुरक्षा इंतजामों पर टिकी हैं।