चोरों के घर ‘डाका’: रुद्रपुर में चोरों को पकड़कर खुद फंस गए आबकारी कर्मचारी! कथित लेन-देन के बाद छोड़ने और माल रखने का आरोप, दरोगा-कांस्टेबल समेत चार को उठा ले गई हिमाचल पुलिस
रुद्रपुर। कानून की रक्षा और व्यवस्था बनाए रखने का जिम्मा जिन कंधों पर होता है, अगर वही कंधे लालच में झुक जाएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले से सामने आए एक मामले ने न सिर्फ आबकारी विभाग की साख को बट्टा लगाया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि ‘पाप का घड़ा एक न एक दिन जरूर भरता है।’
दरअसल, ऊधम सिंह नगर में आबकारी विभाग के चार कर्मचारियों पर ऐसा गंभीर आरोप लगा है, जिसने सरकारी चेकिंग व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रामपुर हाईवे पर चेकिंग के दौरान आबकारी कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश के शिमला में चोरी कर नेपाल भाग रहे नेपाली आरोपियों को पकड़ लिया और वाहन की तलाशी ली। आरोप है कि कर्मचारियों ने कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर पैसे लेकर आरोपियों को छोड़ दिया और बरामद सामान को अपने पास रख लिया। मामला खुलने के बाद शिमला पुलिस ने ऊधम सिंह नगर पहुंचकर चार आबकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि घटना 9 सितंबर की है। शिमला में एक रसूखदार व्यक्ति के घर चोरी के बाद नेपाली मूल के आरोपी चोरी का माल लेकर उत्तराखंड के रास्ते नेपाल भागने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान रामपुर हाईवे पर चेकिंग कर रहे आबकारी विभाग के कर्मचारियों ने संदिग्ध वाहन को रोककर तलाशी ली। तलाशी में चोरी का सामान मिलने के बाद मामला सामान्य चेकिंग से आगे बढ़ गया। आरोप है कि आबकारी कर्मचारियों ने चोरी का सामान बरामद करने के बावजूद इसकी सूचना संबंधित पुलिस को नहीं दी। इसके बजाय आरोपियों से कथित तौर पर पैसे लिए गए और चोरी का सामान अपने कब्जे में रखकर उन्हें आगे जाने दिया गया। बताया जा रहा है कि नेपाली चोरों ने बाद में शिमला में जिस व्यक्ति के घर चोरी की थी, उसे फोन कर उत्तराखंड में हुई पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद मामला शिमला पुलिस तक पहुंचा। शुरुआत में मामला सामने आने पर संदेह की सुई पुलिस व्यवस्था की ओर भी गई। हिमाचल पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस से संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जांच का अनुरोध किया। ऊधम सिंह नगर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो चेकिंग के दौरान आबकारी कर्मचारियों की भूमिका सामने आने लगी। इसके बाद शिमला पुलिस की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय कर कार्रवाई की। शिमला पुलिस के एसएचओ त्रिलोचन नेगी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने मामले में आरोपी बताए जा रहे आबकारी विभाग के चार कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया और बाद में अपने साथ शिमला ले गई। आरोपियों में आबकारी दरोगा देवेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलजीत सिंह, उपनल कर्मी पप्पू लाल और पीआरडी जवान नईम शामिल बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान चोरी के सामान के साथ करीब 80 हजार रुपये की नकदी बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है।
मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है, क्योंकि जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी अवैध गतिविधियों और तस्करी पर निगरानी रखने की है, उन्हीं पर चोरी के माल को कथित तौर पर अपने पास रखने और आरोपियों को छोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही होगी। अब शिमला पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। चोरी का माल कहां से बरामद हुआ, कर्मचारियों ने आरोपियों से कितनी रकम ली, बरामद सामान में क्या-क्या शामिल था और इस पूरे घटनाक्रम में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। इधर, मामला सामने आने के बाद ऊधम सिंह नगर आबकारी विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय स्तर पर आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल चार कर्मचारियों की कथित लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चेकिंग व्यवस्था, विभागीय निगरानी और कर्मचारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। यह पूरा घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड की सीमाओं से होकर अपराधियों और चोरी के माल की आवाजाही रोकने में विभिन्न विभागों की चेकिंग व्यवस्था अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में चेकिंग के दौरान बरामद कथित चोरी के माल को पुलिस को सौंपने के बजाय उसे अपने पास रखने के आरोप ने व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर शिमला पुलिस की जांच और विभागीय कार्रवाई पर है।