भोपाल में सावरकर सेतु पर किसानों का 'हल्ला बोल': मूंग खरीदी की मांग पर अड़े अन्नदाता,बंद रहे स्कूल, सीएम हाउस घेराव की रणनीति

Farmers' protest at Savarkar Setu in Bhopal: Growers adamant on demand for moong procurement; schools remained closed; strategy devised to lay siege to the CM's residence.

भोपाल। मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग की पूरी उपज की खरीदी सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन बेहद उग्र रूप लेता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए किसानों ने भोपाल के व्यस्ततम होशंगाबाद रोड स्थित सावरकर सेतु पर अपना पक्का डेरा जमा लिया है। किसानों के इस बड़े प्रदर्शन और ट्रैफिक जाम की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने ऐहतियातन नर्मदापुरम रोड व प्रभावित इलाकों के सभी स्कूलों में बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी।

मुख्यमंत्री आवास (सीएम हाउस) का घेराव करने के इरादे से निकले सैकड़ों किसानों को जब पुलिस ने मंगलवार को सावरकर सेतु पर बैरिकेडिंग कर रोका, तो उन्होंने वहीं सड़क पर आंदोलन शुरू कर दिया। आंदोलन का नजारा बेहद अनोखा रहा; सड़क के एक तरफ किसान समूहों में दाल-बाटी बनाते दिखे, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में किसान बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते नजर आए। रात भर कई किसान सड़क पर ही विश्राम करते रहे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भारी घेराबंदी के बावजूद किसान मुख्यमंत्री आवास तक पहुँचने के लिए लगातार नई रणनीतियाँ बना रहे हैं। किसान नेता गजेंद्र सिंह जाट ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार और पुलिस प्रशासन उन्हें रोकने की कोशिश करेगा, तो किसान सीएम हाउस तक पहुँचने के लिए नए रास्ते और तरीके तलाशेंगे। उन्होंने कहा, "हम आज हर हाल में मुख्यमंत्री आवास पहुँचेंगे। हमारी माँगों को तुरंत पूरा किया जाए, वरना यह आंदोलन और भी व्यापक रूप अख्तियार करेगा। किसान संगठनों के अनुसार बुधवार सुबह के समय दूर-दराज से आए किसान ही पुल पर मौजूद थे, क्योंकि आसपास के कुछ किसान देर रात अपने घर लौट गए थे। हालांकि, किसान नेताओं ने दावा किया है कि सुबह 11 से 12 बजे के बीच नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और सीहोर जिलों से हजारों की संख्या में किसान भोपाल पहुँच रहे हैं। दोपहर तक सावरकर सेतु पर कल से भी बड़ा जमावड़ा देखने को मिल सकता है, जिसके बाद आगे की रणनीति का एलान किया जाएगा। किसानों के इस सड़क बंद (रोड ब्लॉक) आंदोलन का सीधा असर राजधानी के जनजीवन और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। बच्चों की सुरक्षा और संभावित भीषण ट्रैफिक जाम को देखते हुए नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों के अधिकांश निजी व सरकारी स्कूलों के परिसरों को बंद रखने का फैसला लिया गया। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन की टीमें मुस्तैदी से तैनात हैं। सरकार की ओर से बातचीत का रास्ता निकालने के प्रयास जारी हैं, लेकिन किसान मुख्यमंत्री से सीधे संवाद और अपनी माँगों पर तुरंत अमल की जिद पर अड़े हुए हैं।