काशीपुर में फेसबुकिया पत्रकारों का काला खेल बेनकाबः बैंक मैनेजर पर झूठे आरोप लगाकर खबर हटाने के नाम पर मांगी 50 हजार की रंगदारी, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
काशीपुर। उधम सिंह नगर के काशीपुर से एक बार फिर तथाकथित फेसबुकिया पत्रकारों के रंगदारी के खेल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिना किसी मान्यता के खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर झूठे आरोप लगाकर एक सरकारी बैंक अधिकारी को बदनाम करने की कोशिश की और बाद में खबर हटाने के एवज में मोटी रकम की मांग की। मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। दरअसल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा प्रबंधक सुमन सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि फेसबुक पर ‘यूटी न्यूज’ नाम से सक्रिय हिमांशु ठाकुर ने उनके खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप लगाते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में पूर्व ग्राम प्रधान उमेश कुमार का इंटरव्यू दिखाया गया, जिसमें बिना किसी ठोस तथ्य या सबूत के बैंक मैनेजर पर गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत के अनुसार यह वीडियो पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन था। बाद में पूर्व ग्राम प्रधान उमेश कुमार ने खुद अपने बयान से पलटते हुए लिखित माफी पत्र दिया और स्वीकार किया कि वीडियो में लगाए गए आरोप गलत थे। यह माफी पत्र भी अब एफआईआर का हिस्सा है। मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि जब बैंक मैनेजर सुमन सिंह ने हिमांशु ठाकुर से झूठी खबर हटाने की मांग की, तो उसने 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी। इस सौदेबाजी में विकास गुप्ता नामक व्यक्ति ने बिचौलिये की भूमिका निभाई, जो पहले भी रंगदारी के एक मामले में जेल जा चुका है। बातचीत के दौरान हुई डील की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसमें पैसों की मांग साफ तौर पर सुनी जा सकती है। हालांकि आवाज इंडिया ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। बैंक मैनेजर सुमन सिंह ने पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर पुलिस के सामने सबूत के तौर पर पेश किया। पुलिस ने मामले की जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को खंगाला जा रहा है। इस प्रकरण ने काशीपुर में सक्रिय बिना मान्यता वाले फर्जी न्यूज पेज, फेसबुक आईडी और कथित पत्रकारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे लोग कार्यक्रमों, उद्घाटनों और इंटरव्यू में खुद को पत्रकार बताकर घुस जाते हैं, बिना सत्यापन खबरें चलाते हैं और बाद में दबाव बनाकर पैसे वसूलने का खेल खेलते हैं। प्रशासन और पुलिस के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि ऐसे फर्जी फेसबुक पेज, न्यूज वेबसाइट और यूट्यूब चैनलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए, ताकि पत्रकारिता की साख बनी रहे और आम लोगों को भ्रमित करने वाले इस तरह के रंगदारी तंत्र पर लगाम लग सके।