पर्यावरण मंत्री: उत्तराखंड में 7 जल विद्युत परियोजनाओं को अनुमति देने के लिए केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया एफिडेविट
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को संसद को सूचित करते हुए बताया कि केंद्रीय सरकार ने उत्तराखंड में 7 निर्माणधीन हाइड्रो पावर परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमति देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दायर किया है।
क्यों दायर किया हलफनामा?
शीर्ष अदालत ने सरकार को अलकनंदा पावर कंपनी बनाम अनुज जोशी मामले की सुनवाई करते हुए गंगा नदी के ऊपरी हिस्सों में पनबिजली परियोजनाओं के संबंध में एक सामान्य नीति ढांचे के साथ आने का निर्देश दिया था जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
सात परियोजनाओं में टिहरी स्टेज II (भागीरथी नदी पर), तपोवन विष्णुगढ़ (धौलीगंगा नदी पर), विष्णुगढ़ पीपलकोटी (अलकनंदा नदी पर), सिंगोली भटवारी और फाटा ब्योंग (मंदाकिनी नदी पर), मध्यमहेश्वर (मधमहेश्वर गंगा पर) और कालीगंगा II(कालीगंगा नदी पर) शामिल हैं।
अपने उत्तर में पर्यावरण मंत्री ने बताया कि , "मामला विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई का फैसला अदालत के फैसले के बाद किया जाएगा।"
मंत्री कांग्रेस नेता आनंद शर्मा के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।
पर्वतीय क्षेत्रों में डायनामाइट और विस्फोटकों के अत्यधिक उपयोग पर एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि इस मामले को देखने के लिए एक सक्षम प्राधिकारी है। निगरानी के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर भी एक समिति है। उन्होंने कहा, "अगर हमें उल्लंघन का पता चलता है, तो हम कार्रवाई करेंगे।" योजना और संपत्ति और निर्माण में निवेश के समय कार्बन उत्सर्जन की जांच करने की सरकार की योजना पर, मंत्री ने कहा, "हम इस पर एक नया दिशानिर्देश तैयार कर रहे हैं।" दिल्ली के वायु प्रदूषण पर उन्होंने कहा, यह मुख्य रूप से वाहन प्रदूषण के अलावा औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों के कारण है।