देशभर में ईद-उल-अजहा की धूम: अकीदत के साथ अदा की गई बकरीद की नमाज, मुल्क में अमन-चैन और तरक्की की दुआ
नई दिल्ली। आज देशभर में त्याग, समर्पण और खुदा के प्रति अगाध आस्था का पावन त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) बेहद हर्षोल्लास और धार्मिक परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है। सुबह होते ही मुस्लिम समाज के लोग पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे नजदीकी ईदगाहों और मस्जिदों में इकट्ठा हुए, जहाँ उन्होंने कतारबद्ध होकर बकरीद की विशेष नमाज अदा की। नमाज के बाद मुल्क की तरक्की, खुशहाली और एक-दूसरे की सलामती के लिए हाथ उठाए गए और बारगाह-ए-इलाही में दुआएं मांगी गईं। नमाज मुकम्मल होने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी, जिससे चारों तरफ आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल नजर आया।
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, यह पावन पर्व ज़ुल-हिज्जा महीने के 10वें दिन मनाया जाता है। मीठी ईद यानी ईद-उल-फितर के बाद यह मुस्लिम समुदाय का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस खास दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी दिन मक्का की मुकद्दस हज यात्रा का समापन भी होता है। आज 28 मई को मुख्य रूप से बकरीद की नमाज अदा की गई है, जिसके बाद से ही कुर्बानी का सिलसिला शुरू हो गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुर्बानी की यह रवायत अगले तीन दिनों तक यानी 28, 29 और 30 मई तक जारी रहेगी। इस्लामिक जानकारों के मुताबिक, बकरीद में बकरे या अन्य हलाल जानवरों की कुर्बानी देना महज एक रस्म नहीं है। इसका वास्तविक और सच्चा अर्थ अपने भीतर के स्वार्थ, अहंकार, लालच और बुरी आदतों को छोड़कर एक नेक इंसान बनना है। यह त्योहार सिखाता है कि खुदा की राह में इंसान को अपनी सबसे प्रिय वस्तु को भी समर्पित करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इस त्योहार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के दौर से जुड़ी है। मान्यता है कि हजरत इब्राहिम ने एक रूहानी सपना देखा था, जिसमें वे अपने सबसे प्रिय बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी दे रहे थे। उन्होंने इस सपने को अल्लाह का हुक्म माना और भारी मन से अपने 10 वर्षीय मासूम बेटे की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया। जब वे अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे, तो अल्लाह ने उनके इस बेमिसाल समर्पण, अटूट विश्वास और साफ नीयत को कुबूल फरमाया। ऐन वक्त पर अल्लाह के हुक्म से फरिश्तों ने उनके बेटे की जगह एक मेमना (दुंबा) रख दिया और इस तरह मासूम के बजाय उस मेमने की कुर्बानी हुई। इस ऐतिहासिक और भावुक कर देने वाली घटना के बाद से ही दुनिया भर में ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी की यह मुकद्दस परंपरा शुरू हुई। त्योहार के इस मुबारक मौके पर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आज पूरे देश में बड़े उत्साह और अदब के साथ बकरीद मनाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य नमाज आज 28 मई को संपन्न हो चुकी है और कुर्बानी की रस्म 28, 29 और 30 मई तक चलेगी। इसके साथ ही, उन्होंने शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण 12 सूत्रीय एडवाइजरी (सलाह) भी जारी की है। मौलाना ने देश के तमाम नागरिकों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग अपने-अपने राज्यों के स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें। उन्होंने साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, खुले में कुर्बानी न करने और सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की संवेदनशील तस्वीर या वीडियो साझा न करने की हिदायत दी है, ताकि त्योहार की पवित्रता और समाज का आपसी सौहार्द हर हाल में कायम रहे।