नैनीताल:बुरा न मानो होली है!कुमाऊं विश्वविद्यालय में छुट्टी आई, छुट्टी गई… आदेश तो बरसा पर रंगों पर फिर गया पानी।

Don't mind, it's Holi! Holidays came and went in Kumaon University... orders were given but the colours were wasted.

कुमाऊं विश्वविद्यालय में इस बार होली के रंगों से ज्यादा “आदेश और निरस्तीकरण” की उड़ान देखने को मिली। दो दिन की छुट्टी का ऐलान हुआ, स्टाफ ने टिकटें देखीं, बैग निकले ही थे कि कुछ ही घंटों में आदेश वापस भी हो गया और होली के उत्साह पर प्रशासनिक पानी पड़ गया।

 

दोपहर में अवकाश घोषित, शाम तक निरस्त
विश्वविद्यालय प्रशासन ने होली के अवसर पर 2 और 5 मार्च 2026 को दो दिन का अवकाश घोषित किया।

लेकिन चंद घंटों के भीतर ही नया पत्र जारी कर इन छुट्टियों को निरस्त कर दिया गया। नतीजा ये रहा कि प्राध्यापकों और कर्मचारियों के बीच असमंजस, और कैंपस में चर्चा का रंग कुछ ज्यादा ही गहरा हो गया है 

जानकारी के अनुसार, 20वें दीक्षांत समारोह के आयोजन के चलते पूर्व में 1 नवंबर (इगास) और 2 नवंबर (रविवार) के एवज में अवकाश समायोजित करने संबंधी लिखित सूचना जारी की गई थी।अब विवि प्रशासन का कहना है कि उक्त अवकाश पहले ही 6 और 7 नवंबर को समायोजित किए जा चुके थे। इसी आधार पर 2 और 5 मार्च 2026 की घोषित छुट्टियां निरस्त कर दी गईं। कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में दिए गए अवकाश के क्रम में मार्च की छुट्टियों को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

कैंपस में सवालों के रंग

प्राध्यापकों और कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब अवकाश का समायोजन पहले ही हो चुका था, तो मार्च की तिथियों पर छुट्टी की घोषणा कैसे कर दी गई? और यदि घोषणा हुई, तो कुछ घंटों में उसे वापस लेने की नौबत क्यों आई?
होली के मौके पर जहां रंग, गुलाल और गुझिया की चर्चा होनी चाहिए थी, वहां “नोटिस नंबर” और “समायोजन” की फाइलें चर्चा का विषय बन गईं।
कैंपस में अब यही कहा जा रहा है—
“रंग बरसे या न बरसे, आदेश जरूर बरसेंगे!”
और प्रशासन की तरफ से शायद यही संदेश—
“बुरा न मानो, होली है… छुट्टी थी, फिर नहीं है!”