बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग फिर तेज: 'शीलभद्र याजी नगर' करने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों ने दिया धरना
बख्तियारपुर। बिहार के ऐतिहासिक शहर बख्तियारपुर का नाम बदलने की मुहिम एक बार फिर पूरी तेजी से गरमा गई है। मंगलवार को महान स्वतंत्रता सेनानी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबी रहे पंडित शीलभद्र याजी के परिजनों तथा कई सामाजिक संगठनों ने शहर का नाम बदलने की मांग को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों की मांग है कि बख्तियारपुर का नाम बदलकर तुरंत 'शीलभद्र याजी नगर' किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने बिहार सरकार और केंद्र सरकार से इस दशकों पुराने लंबित प्रस्ताव पर अविलंब मुहर लगाने की जोरदार अपील की है।
धरना स्थल पर जुटे वक्ताओं ने वर्तमान नाम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बख्तियारपुर का नाम नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट करने वाले क्रूर मुगल आक्रांता बख्तियार खिलजी से जुड़ा हुआ है। गुलामी के ऐसे प्रतीकों को ढोना देश के नायकों का अपमान है। वक्ताओं ने तर्क दिया कि इस धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन में देश को पंडित शीलभद्र याजी जैसा महान स्वतंत्रता सेनानी दिया है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इसलिए इस शहर की पहचान एक आक्रांता के बजाय देश के सच्चे सपूत के नाम से होनी चाहिए। धरने में शामिल परिजनों ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि यह मांग नई नहीं है। देश की आजादी की 50वीं वर्षगांठ के मौके पर वर्ष 1997 में ही बख्तियारपुर का नाम बदलने का आधिकारिक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने इस जनभावना का सम्मान करते हुए प्रस्ताव पर अपनी सैद्धांतिक सहमति दी थी। इसके साथ ही बिहार के तत्कालीन राज्यपाल सरदार बूटा सिंह ने भी 'शीलभद्र याजी नगर' नामकरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिया था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि तमाम प्रशासनिक स्वीकृतियों के बावजूद यह फाइल पिछले कई दशकों से केंद्रीय गृह मंत्रालय में धूल फांक रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों ने अब इस लड़ाई को आर-पार के मूड में लड़ने का मन बना लिया है। धरना दे रहे परिजनों ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इस संवेदनशील मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि राज्य और केंद्र सरकार ने इस बार समय रहते नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया, तो बख्तियारपुर की जनता सड़कों पर उतरेगी और एक व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।