कोयला आवंटन मामले में मनमोहन सिंह को क्लीन चिट: सोनिया गांधी बोलीं-इतिहास उन्हें सबसे प्रभावशाली पीएम के तौर पर रखेगा याद
नई दिल्ली। बहुचर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से मिली क्लीन चिट के बाद देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को इस फैसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने सार्वजनिक चर्चा के सबसे दुखद और राजनीतिक प्रतिशोध से भरे एक अध्याय को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास डॉ. मनमोहन सिंह को एक बेहद ईमानदार, शांत, सरल और अत्यधिक प्रभावशाली प्रधानमंत्री के रूप में याद रखेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के करीब डेढ़ साल बाद कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत ने सियासी बहस को फिर गर्म कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को तलाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला बंद कर दिया। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत 2015 में पूर्व प्रधानमंत्री को समन किया गया था। फैसले के बाद कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह की ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन की जवाबदेही को रेखांकित करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास मनमोहन सिंह को एक शांत, सरल और बेहद प्रभावशाली प्रधानमंत्री के तौर पर याद रखेगा। सोनिया ने आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के खिलाफ वर्षों तक सुनियोजित राजनीतिक अभियान चलाया गया और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उस अध्याय का अंत हो गया है। सोनिया गांधी ने एक लेख में कहा कि मनमोहन सिंह के खिलाफ योजनाबद्ध अभियान चलाया गया था। उनके मुताबिक इसमें नौकरशाही, मीडिया, न्यायपालिका, नागरिक समाज और भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों की भूमिका रही। सोनिया ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाए गए इस कथित अभियान की वास्तविकता को सामने लाता है। उन्होंने कहा कि 29 जुलाई का फैसला हालिया राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की ओर से पहले दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया और निचली अदालत द्वारा मामले को आगे बढ़ाने के फैसले को निरस्त किया। अदालत ने माना कि ट्रायल कोर्ट के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था। सोनिया गांधी ने इस मौके पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका दावा था कि विपक्ष में रहते हुए जिन नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाते हैं, उनके भाजपा में शामिल होने के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 में राज्यसभा में मनमोहन सिंह को लेकर की गई ‘रेनकोट पहनकर नहाने’ वाली टिप्पणी का भी जिक्र किया। सोनिया ने कहा कि मनमोहन सिंह पर व्यक्तिगत हमले उनकी सरकार के कामकाज और उपलब्धियों से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास थे। सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह के दस वर्ष के प्रधानमंत्री कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि यूपीए सरकार के दौरान भारत ने तेज आर्थिक विकास देखा। उनके मुताबिक उस दौर में निजी निवेश और खपत में बढ़ोतरी हुई तथा बड़ी संख्या में लोग गरीबी से बाहर निकले। उन्होंने 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भारत ने अपनी आर्थिक मजबूती दिखाई। सोनिया ने शिक्षा का अधिकार, उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी आरक्षण, वन अधिकार कानून और मनरेगा जैसी योजनाओं को मनमोहन सिंह सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो चुका है। शीर्ष अदालत की पीठ ने सीबीआई की जांच बंद करने के फैसले को स्वीकार किया और उनके खिलाफ जारी समन को निरस्त कर दिया। सीबीआई ने 2014 में ही मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, लेकिन विशेष अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोयला ब्लॉक आवंटन विवाद यूपीए सरकार के कार्यकाल का बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस इसे मनमोहन सिंह की ईमानदारी की पुष्टि के तौर पर पेश कर रही है। वहीं, इस फैसले ने उस दौर की राजनीतिक बहस को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। अदालत के फैसले ने मामले में मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही का पटाक्षेप कर दिया है।