सावधान : धीरे-धीरे फिर दोबारा बढ़ने लगा उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का ग्राफ, कोरोना संक्रमण के राज्य में पूरे हुए पांच सौ दिन
सूबे में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। पिछले चार दिनों से राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या में हर दिन इजाफा हो रहा है। आने वाले दिनों में भी यदि संक्रमण बढ़ने का सिलसिला जारी रहा तो इससे आने वाले समय में फिर एक बार बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। प्रदेश उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर के बाद से लगातार मरीजों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही थी संक्रमण की दर भी 0.04 प्रतिशत तक गिर गई थी। लेकिन एक बार फिर पिछले चार दिनों से मरीजों की संख्या में इजाफानजर आ रहा है।
उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार बीते शुक्रवार को राज्य में कोरोना के सिर्फ 11 मरीज थे और संक्रमण की दर 0.04 प्रतिशत थी। लेकिन शनिवार को राज्य में मरीजों की संख्या बढ़कर 33 हो गई और संक्रमण की दर 0.12 प्रतिशत हो गई। रविवार को मरीजों की संख्या बढ़कर 51 हो गई और संक्रमण की दर 0.20 प्रतिशत के करीब थी। जबकि सोमवार को मरीजों की संख्या बढ़कर 54 हो गई और संक्रमण की दर 0.21 रही। मंगलवार को राज्य में 43 नए मरीज मिले और दो संक्रमितों की मौत हो गई।
जानकारी और आकड़ो के अनुसार राज्य में कुल मरीजों की संख्या तीन लाख 41 हजार 874 हो गई है। जबकि मरने वालों का आंकड़ा 7361 हो गया है।स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार यूएस नगर जिले में सर्वाधिक 11 नए मरीज मिले। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में नए मरीजों की संख्या दहाई की संख्या से कम रही। राज्य में संक्रमण की दर 0.15 प्रतिशत रही जबकि मरीजों के ठीक होने की दर 96 प्रतिशत रही। राज्य के विभिन्न अस्पतालों व होम आईसोलेशन से 52 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया जिससे एक्टिव मरीजों की संख्या महज 659 रह गई है। वही इसके साथ उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को शुरू हुए पांच सौ दिन पूरे हो गए। इस अवधि के दौरान राज्य भर में कुल 3 लाख 41 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हुए। इनमें से 96 प्रतिशत लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं। जबकि 7350 लोगों की मौत हुई है। राज्य में संक्रमण के बाद 2.15 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है। इस दौरान कोरोना की दूसरी लहर के दौरान राज्य में संक्रमण की दर सर्वाधिक 25 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले पांच सौ दिनों में राज्य के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और इस वजह से बड़ी संख्या में लोगों के सामने आर्थिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।