झारखंड में राशन कार्ड के लिए अब बतानी होगी अपनी जाति; हेमंत सरकार के नए फरमान पर छिड़ा भारी सियासी बवाल

Caste details now mandatory for ration cards in Jharkhand; Hemant government's new directive sparks massive political row.

रांची। झारखंड में सरकारी राशन (जन वितरण प्रणाली) का लाभ लेने वाले करोड़ों लाभार्थियों के लिए एक बड़ी और बेहद संवेदनशील खबर सामने आ रही है। हेमंत सोरेन सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने राज्य के सभी राशन कार्डधारियों के लिए अपनी 'जाति' को सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट कराना अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद राज्य के सियासी गलियारों से लेकर आम जनता और राशन डीलरों के बीच भारी बहस और विवाद छिड़ गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को भेजे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, अब राशन कार्डधारकों की जाति का ब्योरा ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। यह कार्य ई-पॉस मशीनों और विशेष मोबाइल ऐप के जरिए जन वितरण प्रणाली  के दुकानदारों के माध्यम से कराया जाएगा।

राशन दुकानदारों द्वारा ऑनलाइन दर्ज की गई जाति की प्रविष्टि को ऐसे ही स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका अंतिम अनुमोदन अनिवार्य रूप से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी या पणन पदाधिकारी द्वारा जांच के बाद ही किया जाएगा। झारखंड में वर्तमान में कुल 2,62,71,749 लाभार्थियों के लिए 59,89,931 राशन कार्ड जारी किए गए हैं। अब इन सभी कार्डों में जाति का विवरण दर्ज किया जाना है। इस नए नियम को लेकर मचे बवाल पर राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सरकार का बचाव किया है। उन्होंने विरोधियों पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा राशन कार्ड में जाति को लेकर लोगों को जानबूझकर मिसगाइड किया जा रहा है। असल में यह भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परिवार के वास्तविक सदस्यों का आकलन करने की प्रक्रिया है। पहले देखने में आता था कि एक सदस्य वाले परिवार के नाम पर भी 35 किलो अनाज उठा लिया जाता था, जबकि नियमतः उन्हें केवल 5 किलो मिलना चाहिए। सरकार केवल पारदर्शी व्यवस्था बनाना चाहती है। हमारी सरकार सभी जातियों का पूरा सम्मान करती है, किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। सरकार के इस फैसले पर मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि राशन को जाति के चश्मे से देखना पूरी तरह गलत है।

झारखंड में ऐसा प्रावधान पहले कभी नहीं था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त राशन देने की व्यवस्था है और राज्य के लगभग 86 प्रतिशत गरीबों को इसका लाभ मिल रहा है। ऐसे में राशन कार्ड के लिए जाति पूछना बेहद अनुचित है। अगर कोई नियम विरुद्ध राशन ले रहा है, तो उस पर स्क्रूटनी कर कार्रवाई की जानी चाहिए, न कि पूरी जनता को जाति बताने के लिए मजबूर किया जाए। सरकार के इस नए आदेश ने राज्य के करीब 25 हजार राशन दुकानदारों (डीलरों) को भारी धर्मसंकट में डाल दिया है। फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव ज्ञानदेव झा ने इस निर्णय का पुरजोर विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि जब राशन कार्डधारी दुकान पर आएंगे, तो उनसे सीधे उनकी जाति पूछना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन होगा। इससे समाज में अनावश्यक बहस, नाराजगी और तनाव पैदा होगा। डीलर एसोसिएशन ने सरकार से इस संवेदनशील फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि कोई राशन कार्डधारी अपनी गोपनीयता का हवाला देकर या स्वेच्छा से अपनी जाति बताने से इनकार कर देता है, तो ऐसी स्थिति में क्या उसका राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा? इस अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील बिंदु पर सरकारी गाइडलाइन में फिलहाल कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, जिससे आम जनता के बीच भ्रम और डर का माहौल बना हुआ है।