Sep 13, 2026 Login

BRICS शिखर सम्मेलन: दिल्ली से दुनिया को एकता और बहुध्रुवीय व्यवस्था का संदेश! 11 देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया 45 पन्नों का 140 बिंदुओं वाला ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’, दिखी मजबूत केमिस्ट्री

BRICS Summit: A message of unity and a multipolar order from Delhi to the world! Eleven nations unanimously adopted the 45-page, 140-point ‘New Delhi Declaration 2026’; strong chemistry was evident.

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम पड़ाव के रूप में सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत BRICS के सभी सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। दो दिनों तक चली गहन चर्चाओं के बीच विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण और मतभेद होने के बावजूद भारत की अध्यक्षता में सभी 11 सदस्य देशों ने 45 पन्नों और 140 बिंदुओं वाले ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। BRICS सम्मेलन का यह सर्वसम्मत घोषणापत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की मांग के दौर से गुजर रही है। सम्मेलन के दौरान ग्लोबल साउथ की भूमिका, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून, वैश्विक शासन व्यवस्था, आर्थिक सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे प्रमुखता से चर्चा में रहे। सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों का आभार जताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर वह सभी नेताओं की सहभागिता और मूल्यवान योगदान के लिए हृदय से धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं की मौजूदगी BRICS की बढ़ती प्रासंगिकता और क्षमता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चाओं ने साझा विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने BRICS को वैश्विक सहयोग और साझा प्रयासों का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि संगठन अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सदस्य देश मिलकर BRICS से जुड़ी अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। उन्होंने नई दिल्ली सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी नेताओं का अभिनंदन भी किया। सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तेजी से बदलती दुनिया में ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे बदलावों के दौर से गुजर रही है, जिन्हें एक सदी में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक ग्लोबल साउथ दुनिया को बहुध्रुवीय बनाने में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर चुका है। शी जिनपिंग ने BRICS देशों से इतिहास में आए इस अवसर को पकड़ने, ग्लोबल साउथ को साथ लाने और वैश्विक स्थिरता के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ताकत के आधार पर फैसले लेने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाया। शी ने तर्क दिया कि केवल ताकतवर होने का मतलब यह नहीं है कि कोई देश हमेशा सही हो सकता है। उन्होंने सभी देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के समान अनुप्रयोग और दोहरे मानदंडों से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय नियमों की तुलना ट्रैफिक व्यवस्था से करते हुए कहा कि नियमों के बिना दुनिया ऐसी स्थिति पैदा कर सकती है, जैसे बिना ट्रैफिक लाइट वाला चौराहा, जहां अराजकता का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू हो और किसी भी देश को सिर्फ अपनी ताकत या आर्थिक क्षमता के आधार पर विशेष अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

चीन के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका मजबूत करने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सभी देशों की समान भागीदारी की वकालत की। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में सुधार और विकासशील देशों की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में आवाज मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई। BRICS सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भी महत्वपूर्ण विषय रहा। शी जिनपिंग ने कहा कि ग्लोबल साउथ को AI का विकास मानव कल्याण और साझा समृद्धि के लिए करना चाहिए। उन्होंने चीन की ओर से BRICS AI ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने की पहल का ऐलान किया। इसके साथ ही बड़े लैंग्वेज मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग, AI प्रशिक्षण और सेमिनारों के आयोजन पर भी जोर दिया गया। शी ने कहा कि नई तकनीक का इस्तेमाल साझा विकास और समृद्धि के लिए होना चाहिए। BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात को शानदार बातचीत बताया। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ भारत और मिस्र के बीच बढ़ती दोस्ती और सहयोग को लेकर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हाल के समय में भारत और मिस्र के बीच संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS सम्मेलन से इतर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से भी मुलाकात की। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो से मिलकर उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति के गर्मजोशी भरे अंदाज, सकारात्मक सोच और आशावादी रवैये की तारीफ की। दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

यूक्रेन युद्ध पर भारत-चीन का शांति प्रस्ताव
BRICS सम्मेलन के दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर भी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया। रूस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत और चीन ने यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए शांति वार्ता में मदद करने की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन की इस तत्परता का स्वागत किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते का रास्ता तलाश रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में पुतिन से फोन पर बातचीत कर यूक्रेन युद्ध को जल्द खत्म करने की अपील की थी और कहा था कि इससे अमेरिका और रूस के संबंधों को फिर से बेहतर बनाने का रास्ता खुल सकता है। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के मॉस्को और कीव दौरे के बाद यह बातचीत हुई थी। हालांकि, इन कूटनीतिक प्रयासों से अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

मोदी-शी-पुतिन की ‘तिकड़ी’ ने खींचा ध्यान
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने भी दुनिया का ध्यान खींचा। कुछ विश्लेषकों ने तीनों नेताओं की करीबी और सहज बातचीत को वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण तस्वीर के तौर पर देखा। सम्मेलन के पहले दिन तीनों नेताओं की मुस्कुराते हुए और एक-दूसरे का हाथ थामे तस्वीर भी चर्चा का केंद्र बनी। इसे भारत, रूस और चीन के बीच संवाद और वैश्विक मंच पर सहयोग के संकेत के रूप में देखा गया। हालांकि, तीनों देशों के अपने-अपने रणनीतिक हित और मतभेद भी हैं, ऐसे में इस तस्वीर को किसी औपचारिक गठजोड़ के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की स्थिति लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। भारत के रूस के साथ लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, वहीं पश्चिमी देशों के साथ भी भारत के आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते मजबूत हैं। इसके अलावा भारत यूक्रेन के साथ भी संवाद बनाए हुए है। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी युद्ध को लेकर स्पष्ट रूप से शांति और बातचीत के रास्ते पर जोर देते रहे हैं। SCO सम्मेलन के दौरान भी उन्होंने अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई थी। यही वजह है कि रूस और यूक्रेन दोनों के साथ कामकाजी संबंध रखने वाले देशों में भारत की स्थिति विशेष मानी जा रही है। ‘इंडिक रिसर्चर्स फोरम’ के निदेशक श्रीनिवासन बालकृष्णन ने भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में भारत की इसी कूटनीतिक पहुंच को रेखांकित किया। उनके मुताबिक भारत के पास मॉस्को, तेहरान और पश्चिमी देशों से एक साथ बातचीत करने की विशेष क्षमता है।