कोलंबो में बोकारो के मल्लिकार्जुन का डबल धमाका: जंप रोप में जीते दो स्वर्ण पदक, वैश्विक मंच पर लहराया तिरंगा

Bokaro's Mallikarjun's double triumph in Colombo: Wins two gold medals in jump rope, waves the Tricolour on the global stage.

बोकारो। झारखंड के उद्योग नगर बोकारो के एक होनहार लाल ने सात समंदर पार श्रीलंका की धरती पर अपनी खेल प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया है कि पूरा देश आज उन पर गर्व कर रहा है। कोलंबो में 27 से 30 जून तक आयोजित 'दक्षिण एशियाई युवा खेल 2026' में बोकारो के युवा खिलाड़ी मल्लिकार्जुन मिश्रा ने जंप रोप (रस्सी कूद) प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने कुल 12 स्वर्ण पदक जीते, जिसमें अकेले मल्लिकार्जुन के दो गोल्ड मेडल शामिल हैं।

एकलव्य स्पोर्ट्स आर्ट एंड कल्चर अकादमी और बोकारो जिला जंप रोप संघ के स्टार खिलाड़ी मल्लिकार्जुन मिश्रा ने प्रतियोगिता के दौरान अपनी चपलता और गति से सबको हैरान कर दिया। मल्लिकार्जुन ने जंप रोप की फ्रीस्टाइल स्पर्धा में अपने बेहतरीन हुनर का प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस कड़े मुकाबले में नेपाल को रजत (दूसरा स्थान) और बांग्लादेश को कांस्य पदक (तीसरा स्थान) से संतोष करना पड़ा। अपनी जीत के सिलसिले को बरकरार रखते हुए मल्लिकार्जुन ने 'ट्रिपल अंडर स्पर्धा' में भी अद्वितीय खेल दिखाया और देश के लिए दूसरा गोल्ड मेडल जीता। इस स्पर्धा में भूटान दूसरे और बांग्लादेश तीसरे पायदान पर रहा। मल्लिकार्जुन मिश्रा एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वह बोकारो के रहने वाले ब्रज भूषण मिश्रा और कुसुम मिश्रा के सुपुत्र हैं। उनके पिता ब्रज भूषण मिश्रा सेल के हॉट स्ट्रिप मिल में चार्जमैन के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता कुसुम मिश्रा एक गृहिणी हैं। एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाले मल्लिकार्जुन की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का अटूट सहयोग और त्याग रहा है। अपनी इस ऐतिहासिक और गौरवमयी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए मल्लिकार्जुन ने इसका पूरा श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद, कड़े और नियमित अभ्यास तथा अपने कोच के मार्गदर्शन को दिया है। मल्लिकार्जुन की यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि न केवल बोकारो और झारखंड के लिए, बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए बेहद गर्व की बात है। उसने अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम पाया है। मुझे पूरा विश्वास है कि वह आने वाले समय में भी अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर देश के लिए और कई मेडल जीतकर लाएगा और देश के अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। मल्लिकार्जुन की इस दोहरी स्वर्णिम सफलता की खबर जैसे ही बोकारो पहुंची, खेल प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर खेल संघों तक, हर तरफ से इस युवा चैंपियन को बधाइयां मिलने का सिलसिला जारी है।