Oct 14, 2026 Login
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एनपीसीआई का बड़ा तोहफा: दिवाली तक मुफ्त रहेगा 2,000 रुपये से अधिक का यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन

Big gift from NPCI: UPI merchant transactions above ₹2,000 to remain free until Diwali.

नई दिल्ली। आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले देश के करोड़ों व्यापारियों, दुकानदारों और आम जनता के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को फिलहाल टाल दिया गया है। अब यह नया नियम दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा, जिसकी नई तारीखों की घोषणा सरकार द्वारा अलग से की जाएगी। 

दिवाली से पहले डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों और ग्राहकों के लिए यूपीआई शुल्क को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह व्यवस्था अब दिवाली के तुरंत बाद लागू होगी और इसकी नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इससे त्योहारी खरीदारी के दौरान व्यापारियों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद है। यूपीआई के जरिए भुगतान आज दुकानों, बाजारों, पेट्रोल पंपों और कई अन्य सेवाओं में आम हो चुका है। ऐसे में व्यापारी भुगतानों पर शुल्क से जुड़ा कोई भी बदलाव कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर एक अहम बात यह है कि व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क और ग्राहक पर लगने वाला शुल्क अलग-अलग विषय हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को भुगतान करते समय लागू नियमों की जानकारी रखना जरूरी है। दी गई जानकारी के अनुसार, चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट प्रस्तावित है। इस शुल्क का वितरण बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और यूपीआई अनुप्रयोगों के बीच किया जाना है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एमडीआर व्यापारी भुगतान से जुड़ा शुल्क है। इसे सीधे ग्राहक से वसूल किया जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। ग्राहकों पर किसी अतिरिक्त राशि का असर होगा या नहीं, यह संबंधित नियमों और भुगतान व्यवस्था पर निर्भर करेगा। प्रस्तावित ढांचे में कुछ क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क व्यवस्था बताई गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, पेट्रोल-डीजल और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रतिशत आधारित शुल्क के बजाय प्रति लेन-देन पांच रुपये का निश्चित शुल्क प्रस्तावित है। वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों और शेयर कारोबार से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर का उल्लेख है। इसके लिए प्रति लेन-देन अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है। इन दरों और इनके लागू होने की अंतिम स्थिति की पुष्टि संबंधित आधिकारिक अधिसूचना से की जानी चाहिए। आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में पैसे भेजने यानी पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) हस्तांतरण पर इस प्रस्तावित व्यापारी शुल्क का असर नहीं पड़ना है। यह हस्तांतरण पहले की तरह मुफ्त रहने की बात कही गई है। इसी तरह, दुकानों और मॉल में ₹2,000 तक की खरीदारी पर एमडीआर नहीं लगाए जाने का उल्लेख है। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए भी राहत की व्यवस्था बताई गई है। पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत यूपीआई क्यूआर कोड से हर महीने एक लाख रुपये तक भुगतान स्वीकार करने पर शुल्क नहीं लगने की बात कही गई है। दिवाली के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है और डिजिटल भुगतान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे समय में शुल्क व्यवस्था लागू करने की समयसीमा आगे बढ़ने से कारोबारियों को तत्काल अतिरिक्त लागत की चिंता से राहत मिल सकती है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित एमडीआर की अंतिम लागू तिथि और अलग-अलग क्षेत्रों में लागू दरों की पुष्टि आधिकारिक सूचना से की जाए। ग्राहकों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि व्यापारी पर लागू शुल्क अपने आप ग्राहक पर लागू शुल्क नहीं बन जाता। नई व्यवस्था के लागू होने से पहले इसके नियम स्पष्ट होना व्यापारियों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए जरूरी होगा।