संसद से सड़कों तक संग्राम: एनडीए सांसदों ने हाथों में 'चर्चा से मत भागो राहुल' के पोस्टर लेकर निकाला मार्च
दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन भी संसद भवन से लेकर सड़कों तक जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है। दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और झारखंड में छात्रों के उग्र आंदोलन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष पूरी तरह आमने-सामने आ गए हैं। हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। एक तरफ जहां विपक्ष केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान और चर्चा की मांग पर अड़ा है, वहीं दूसरी तरफ एनडीए सांसदों ने विपक्ष के रवैये के विरोध में संसद परिसर में जोरदार विरोध मार्च निकाला।
संसद के मानसून सत्र के 17वें दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म नहीं हो सका। सदन के भीतर हंगामे के बीच मंगलवार को एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए संसद परिसर में मार्च निकाला। इस दौरान सांसदों के हाथों में ‘चर्चा से मत भागो राहुल’ जैसे पोस्टर नजर आए। एनडीए ने आरोप लगाया कि सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर सदन नहीं चलने दे रहा है। मार्च से पहले सुबह करीब नौ बजे संसद भवन में एनडीए सांसदों की बैठक हुई। बैठक के दौरान वंदे मातरम् का गायन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए सांसदों ने तिरंगा लहराया। इसके बाद सांसद संसद परिसर में मार्च के लिए निकले। सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष को सदन में बहस के लिए आगे आना चाहिए, जबकि विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। संसद में इस समय दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई,अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव चरम पर है। विपक्षी सांसद इन मामलों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। वहीं, भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष की दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दूसरी, केंद्रीय गृह मंत्री का बयान। उनका कहना है कि सरकार मुद्दों के कुछ हिस्सों पर ही चर्चा करना चाहती है। राम गोपाल यादव ने सवाल उठाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले पर चर्चा से सरकार क्यों बच रही है।
वहीं कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री से बयान देने की मांग की। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी ‘काम रोको प्रस्ताव’ का नोटिस दिया। उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून में बदलाव को लेकर चर्चा की मांग की। संसद के बाहर झारखंड का छात्र आंदोलन भी राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सोमवार को रांची में छात्रों ने विधानसभा घेराव किया था। प्रदर्शनकारी जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला है। भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के नेता जंतर-मंतर के आंदोलन की बात करते हैं, लेकिन झारखंड में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और वाटर कैनन की कार्रवाई पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच और परीक्षाएं निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरा और कहा कि युवाओं को उनकी मांगों के लिए सड़कों पर आने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी छात्रों से बातचीत करने की मांग की। इस बीच भाजपा ने झारखंड बंद के जरिए छात्र आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। वहीं संसद में एनडीए का मार्च विपक्ष के खिलाफ सत्ता पक्ष की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में मानसून सत्र के अगले दिनों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव जारी रहने के आसार हैं। बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाकर संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो पाएगी या राजनीतिक गतिरोध सदन की कार्यवाही पर भारी पड़ेगा।