Aug 30, 2026 Login

बरेली: कुलपति केपी सिंह के विदाई समारोह में एबीवीपी का हंगामा! नारेबाजी और धक्का-मुक्की, एबीवीपी ने लगाए वित्तीय अनियमितता के आरोप! कुलपति को सुरक्षा घेरे में निकलना पड़ा

Bareilly: ABVP creates a ruckus at Vice-Chancellor KP Singh's farewell ceremony! Amidst slogan-shouting and scuffles, the ABVP leveled allegations of financial irregularities; the Vice-Chancellor had

बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह के कार्यकाल की समाप्ति से एक दिन पहले रविवार को आयोजित विदाई समारोह के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। प्लेसमेंट सेल के सभागार में शिक्षक संघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते कार्यकर्ताओं और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच तीखी बहस होने लगी, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय के शिक्षक और सुरक्षाकर्मी कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह को सभागार से बाहर ले जाने लगे। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके चलते धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाल लिया और कोई गंभीर अप्रिय घटना नहीं हुई। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में प्रस्तावित अटल सभागार के निर्माण में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। इसके अलावा बीते वर्ष आंदोलन के दौरान परिषद कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी उठाई गई। कुछ देर तक चले विरोध और बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हुई।

इसके बाद कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह स्वयं एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ दोबारा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। कार्यक्रम फिर से शुरू हुआ और एबीवीपी कार्यकर्ता सभागार की पहली पंक्ति में बैठकर विदाई समारोह में शामिल हुए। प्रो. कृष्ण पाल सिंह का कुलपति के रूप में कार्यकाल 31 अगस्त को पूरा हो रहा है। इसी बीच उनके अगले कार्यभार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के अगले कुलपति पद के लिए जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक हो रही है, उनमें एक नाम फिर प्रो. केपी सिंह का ही बताया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद की दौड़ में ‘केपी सिंह’ नाम के दो व्यक्तियों की चर्चा है—एक दिल्ली से जुड़े केपी सिंह और दूसरे बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह। हालांकि प्रो. कृष्ण पाल सिंह को कुमाऊं विश्वविद्यालय का अगला कुलपति बनाए जाने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रो. कृष्ण पाल सिंह के कार्यकाल को लेकर इससे पहले भी कई बार विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। उनके खिलाफ बीएड प्रवेश परीक्षा, वाहनों के खर्च और अन्य व्यवस्थाओं में 74 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। कोरोना काल के दौरान किट खरीद में करीब चार करोड़ रुपये की कथित अनियमितता का आरोप भी सामने आया था। इन मामलों को लेकर शिकायतें और जांच की मांग किए जाने की बात कही गई थी। उनकी नियुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। सेवानिवृत्त प्रो. एके जेटली ने कुलाधिपति को शिकायत भेजकर प्रो. केपी सिंह की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंतनगर विश्वविद्यालय से प्रतिनियुक्ति अवकाश से संबंधित औपचारिकताएं पूरी हुए बिना उन्होंने एक सितंबर 2023 को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि उनकी पैतृक संस्था की ओर से अवकाश विस्तार को लेकर कुछ शर्तें निर्धारित की गई थीं और बाद में सितंबर 2023 से अगस्त 2026 तक अवकाश विस्तार का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया।

हालांकि विवादों के साथ-साथ प्रो. कृष्ण पाल सिंह के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण पहल भी हुईं। कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षण को बढ़ावा देने के साथ रोहिलखंड इन्क्यूबेशन फाउंडेशन, एलुमिनी सेल, अनुसंधान निदेशालय, अटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर, महिला अध्ययन उत्कृष्टता केंद्र, कंसल्टेंसी सेल, लर्निंग विद अर्निंग और विश्वविद्यालय छात्र सहायता केंद्र जैसी पहलों को स्थापित या मजबूत करने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। छात्र, शिक्षक और कर्मचारियों से जुड़े हितों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने का भी उल्लेख किया जाता है। विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन में पूर्व में बी ग्रेड प्राप्त रुहेलखंड विश्वविद्यालय को ए डबल प्लस ग्रेड हासिल होने को भी प्रो. केपी सिंह के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। ऐसे में कार्यकाल के अंतिम दिन से पहले विदाई समारोह में हुआ हंगामा और इसके साथ ही कुमाऊं विश्वविद्यालय के अगले कुलपति को लेकर चल रही चर्चाओं ने प्रो. केपी सिंह को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।