Oct 14, 2026 Login
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बिम्सटेक बैठक में अमित शाह की दो टूक: भारत ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया,लेकिन आतंकवाद और ड्रग्स पर हमारी नीति जीरो टॉलरेंस

Amit Shah's blunt message at the BIMSTEC meeting: India has never attacked anyone, but our policy on terrorism and drugs is zero tolerance.

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आयोजित बिम्सटेक देशों के गृह मंत्रियों की पहली ऐतिहासिक बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और संगठित अपराधों के खिलाफ भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया है। गृह मंत्री ने कहा कि भारत हमेशा से 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ वैश्विक शांति, सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के पथ पर आगे बढ़ा है।

नशा तस्करी, आतंकवाद और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब किसी एक देश की कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए पूरे क्षेत्र को एकजुट होकर साझा रणनीति बनानी होगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में बिम्सटेक के गृह मंत्रियों की पहली बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने नशे के अवैध कारोबार को युवाओं, समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला बताते हुए सदस्य देशों से मिलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि नशा तस्करी से होने वाली अवैध कमाई संगठित अपराध को ताकत देती है और इसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में भी किया जाता है। गृह मंत्री ने कहा कि बिम्सटेक क्षेत्रीय एकीकरण, आर्थिक सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। भारत के लिए इस पहली बैठक की मेजबानी करना गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र की साझा चुनौतियों का समाधान आपसी सहयोग और ठोस व्यवस्थाओं के माध्यम से ही संभव है। अमित शाह ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर युवाओं और समाज के भविष्य पर पड़ता है। इस अवैध कारोबार को किसी एक देश की कार्रवाई से पूरी तरह नहीं रोका जा सकता। इसके लिए पूरे क्षेत्र को साथ लेकर चलने वाली रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने आगाह किया कि नशा तस्करी से मिलने वाला अवैध धन संगठित अपराध के नेटवर्क को आर्थिक मजबूती देता है। यही धन आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी इस्तेमाल हो सकता है। ऐसे में नशीले पदार्थों की आपूर्ति, तस्करी और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। गृह मंत्री ने प्रतिबंधित मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थों के दुरुपयोग और डार्क वेब के माध्यम से होने वाले लेन-देन को भी बड़ी चुनौती बताया। तकनीक और इंटरनेट के सहारे संचालित होने वाले अवैध कारोबार पर नियंत्रण के लिए देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर उनका जोर रहा। अमित शाह ने मानव तस्करी को साझा सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इसके पीड़ितों की पहचान करने, उन्हें बचाने, आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने, पुनर्वास करने और सुरक्षित रूप से उनके देश वापस भेजने के लिए सदस्य देशों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद देना सामूहिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। इस दिशा में सीमा पार सहयोग और संबंधित देशों के बीच बेहतर तालमेल की भूमिका अहम है। बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत शांति, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मानव कल्याण के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। भारत ने कभी किसी देश पर आक्रमण करने या प्रभुत्व स्थापित करने की नीति में विश्वास नहीं किया, बल्कि सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान तथा मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है।उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग का उद्देश्य केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करना नहीं, बल्कि साझा सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी समाधान भी होना चाहिए। अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 4 अप्रैल 2025 को बैंकॉक में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के संबोधन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक को केवल क्षेत्रीय संगठन नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सुरक्षा के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया था। गृह मंत्री ने कहा कि इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए सदस्य देशों के गृह मंत्रियों की जिम्मेदारी है कि वे आपसी सहयोग को व्यावहारिक व्यवस्थाओं में बदलें। बैठक का व्यापक संदेश यही रहा कि आतंकवाद, नशा तस्करी, संगठित अपराध और मानव तस्करी जैसी सीमापार चुनौतियों का मुकाबला साझा जिम्मेदारी और समन्वित प्रयासों से किया जाना चाहिए।