लाल आतंक के खात्मे के बाद अब 'मिशन सरहद': 6000 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को अभेद्य बनाएगी सरकार
नई दिल्ली। देश को लाल आतंक (नक्सलवाद) के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त कराने की ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब केंद्र सरकार ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित और अभेद्य बनाने के लिए कमर कस ली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 'मिशन सरहद' का एक वृहद खाका तैयार किया गया है। इस महायोजना के तहत अगले कुछ वर्षों में देश की करीब 6,000 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और नशे के कारोबार से शत-प्रतिशत मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है।
उच्च पदस्थ सैन्य और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकार चरणबद्ध तरीके से इस अभियान को अंजाम देगी। इसके तहत पहले अति-संवेदनशील, फिर संवेदनशील और अंत में अन्य सीमाई क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। 'स्मार्ट बॉर्डर परियोजना' के तहत तात्कालिक रूप से देश के 8 सबसे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। आधुनिक दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सरहद पर अब तकनीक का कड़ा पहरा होगा। सीमाओं पर स्वदेशी ड्रोन, मोशन सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्विलांस सिस्टम तैनात किए जाएंगे। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन व अन्य स्वदेशी संस्थानों द्वारा विकसित किए गए अत्याधुनिक ड्रोन जैसे इंद्रजाल, भार्गवास्त्र, दिव्यास्त्र और नागास्त्र को इस मोर्चे पर तैनात किया जाएगा। ये ड्रोन न केवल दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखेंगे, बल्कि सीमा पार से होने वाली ड्रग्स, ड्रोन हमलों और नकली नोटों की आपूर्ति को भी नाकाम करेंगे। इस योजना का दायरा सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान, चीन, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार से सटे सीमावर्ती गांवों को भी सामरिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इन क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों से लेकर स्थानीय पटवारी और सरपंचों तक का सक्रिय सहयोग लिया जाएगा, ताकि सीमा पर सुरक्षा का एक मजबूत और त्रिस्तरीय नागरिक कवच तैयार हो सके। सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन से केंद्र सरकार के हौसले बुलंद हैं। इससे पहले सीमा सुरक्षा और फेंसिंग (बाड़ लगाने) के काम में राज्य सरकार की तरफ से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा था। लेकिन अब बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बाद, पश्चिम बंगाल से सटी सीमा के जिन हिस्सों में फेंसिंग का काम बचा हुआ है, उसे युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर पूरा किया जाएगा। असुरक्षित सीमाओं के कारण देश ने लंबे समय तक आतंकवाद, ड्रग्स और नकली नोटों की मार झेली है, जो हमारी आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा खतरा थे। अब सरकार की इस चौतरफा रणनीति से भारत की सरहदें न सिर्फ सुरक्षित होंगी, बल्कि पूरी तरह से डिजिटल और अभेद्य बन जाएंगी।