कुमाऊँ यूनिवर्सिटी में रिजल्ट विवाद पर ABVP का धरना,रिजल्ट और सिस्टम पर सवाल,री-एग्जाम की मांग

ABVP Stages Sit-in at Kumaon University Over Result Dispute; Demands Re-examination

कुमाऊँ विश्वविद्यालय एक बार फिर परीक्षा परिणामों को लेकर विवादों के केंद्र में आ गया है। बीएससी 5वें सेमेस्टर (जूलॉजी) और बीकॉम तृतीय सेमेस्टर के बैक पेपर परिणामों में कथित अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

छात्रों का आरोप है कि 2025-26 सेमेस्टर के घोषित परिणामों में कई विद्यार्थियों के अंक अपेक्षा से काफी कम आए हैं, जिससे बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं। नाराज़ छात्रों का कहना है कि या तो परिणामों की पुनः जांच की जाए या फिर संबंधित विषयों की री-एग्जाम कराई जाए, क्योंकि ऐसे परिणाम उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। धरने के दौरान छात्रों ने कई गंभीर प्रशासनिक और शैक्षणिक मुद्दों को भी उठाया।

छात्रों के अनुसार, लगभग 51 विद्यार्थियों के परिणाम अभी तक घोषित नहीं हो पाए हैं, क्योंकि संबंधित कॉलेजों द्वारा उनके इंटरनल असेसमेंट के अंक विश्वविद्यालय को समय पर नहीं भेजे गए। 25 तारीख को परिणाम घोषित होने के बाद भी बार-बार अनुरोध के बावजूद 5–6 दिन बीत जाने के बाद भी यह प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जिससे छात्रों में चिंता और असंतोष बढ़ गया है।

 

छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कई सेमेस्टर में एक ही विषय में बड़ी संख्या में छात्र फेल हो रहे हैं, जो मूल्यांकन प्रणाली या शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि व्यक्तिगत गलती के आधार पर परिणाम प्रभावित होते हैं, तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन बार-बार एक जैसी स्थिति सामने आना व्यवस्था की खामियों को दर्शाता है।

पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। वर्तमान में प्रवेश नेट (NET) के माध्यम से हो रहा है, जबकि छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय स्वयं पारदर्शी प्रवेश परीक्षा आयोजित करे, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बन सके।

नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर भी छात्रों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नीति को रोजगारपरक और छात्रहितैषी बनाने का दावा किया गया था, लेकिन इसमें कई व्यावहारिक कमियां हैं। विशेष रूप से पांचवें सेमेस्टर में फेल होने पर पूरा एक साल खराब होने की स्थिति छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डालती है। छात्रों ने नीति में अधिक लचीलापन और सुधार की मांग की है।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से बार-बार संपर्क कर इन समस्याओं के समाधान की अपील की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की है कि लंबित इंटरनल मार्क्स तुरंत जमा किए जाएं, मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा की जाए, बार-बार फेल होने की समस्या पर रोक लगे, पीएचडी प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय स्तर की पारदर्शी परीक्षा बहाल हो और रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं। धरने पर बैठे ABVP कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया है। कुलपति प्रो. डीएस रावत ने कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएचडी प्रवेश के लिए इंट्रेंस परीक्षा अनिवार्य है और रिक्त सीटों को भरने के लिए शासन स्तर पर बातचीत की जाएगी।