नया अध्यायः 54 साल बाद चांद की ओर इंसान की ऐतिहासिक वापसी! नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च, ओरियन कैप्सूल में सवार चार अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर रवाना

A new chapter: 54 years later, humanity's historic return to the Moon! NASA's Artemis 2 mission successfully launched, with four astronauts aboard the Orion capsule headed for the Moon.

नई दिल्ली। अंतरिक्ष इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। नासा ने आज 2 अप्रैल 2026 को अपने बहुप्रतीक्षित ‘आर्टेमिस 2’ मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से भारतीय समयानुसार सुबह 3 बजकर 54 मिनट पर विशाल एसएलएस रॉकेट ने उड़ान भरी। यह मिशन इसलिए बेहद खास है क्योंकि करीब 54 साल बाद इंसान फिर से चांद की ओर रवाना हुआ है। अपोलो 17 मिशन के बाद यह पहला मौका है जब मानव अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के इतने करीब जाएंगे। इस मिशन में मिशन कमांडर के रूप में रीड वाइसमैन, पायलट के रूप में विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। ये चारों अंतरिक्ष यात्री अब ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चांद की ओर बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है कि आर्टेमिस-2 कोई लैंडिंग मिशन नहीं है, बल्कि यह 10 दिन का एक महत्वपूर्ण परीक्षण मिशन है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के बेहद करीब, लगभग 9600 किलोमीटर तक जाएंगे, उसकी परिक्रमा करेंगे और फिर पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। इस मिशन के जरिए ओरियन कैप्सूल की गहरे अंतरिक्ष में कार्य करने की क्षमता, जीवन रक्षा प्रणाली, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और हीट शील्ड जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। वापसी के समय यह कैप्सूल करीब 40 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। मिशन के दौरान एक खास पल वह भी होगा, जब अंतरिक्ष यात्री चांद के पीछे वाले हिस्से से गुजरेंगे। इस दौरान कुछ समय के लिए पृथ्वी से उनका संपर्क टूट जाएगा, लेकिन इसी समय कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग भी किए जाएंगे।

करीब 10 दिन बाद यह मिशन प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग के साथ पूरा होगा, जहां पैराशूट की मदद से ओरियन कैप्सूल को उतारा जाएगा। यह मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी योजनाओं की नींव है। आर्टेमिस-2 की सफलता के बाद नासा का अगला लक्ष्य आर्टेमिस 3 मिशन के तहत इंसानों को चांद की सतह पर उतारना है और आगे चलकर वहां स्थायी बेस बनाने की तैयारी भी की जा रही है। इतना ही नहीं यह मिशन भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशनों का रास्ता भी तैयार करेगा और नई पीढ़ी को अंतरिक्ष विज्ञान की ओर प्रेरित करेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस ऐतिहासिक मिशन पर टिकी हुई है। 54 साल बाद इंसान फिर चांद की ओर बढ़ चला है और यह कदम मानवता के भविष्य को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।