उत्तराखंड वासियों को बीएसएनएल की सौगात,स्वदेशी 4जी से जुड़े 2600 गांव,नो-नेटवर्क जोन में भी काम करेंगे सैटेलाइट फोन
देहरादून। 80वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारत संचार निगम लिमिटेड ने उत्तराखंड के पर्वतीय, दूरस्थ और सीमांत इलाकों के लिए डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी सौगात दी है। राज्य में स्वदेशी 4G तकनीक के तेजी से विस्तार के चलते अब तक लगभग 2,600 गांवों को हाई-स्पीड 4जी नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। इस कदम से उत्तराखंड के दूर-दराज के इलाकों में संचार क्रांति की एक नई सुबह की शुरुआत हुई है।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तराखंड के दूरस्थ, पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों के लिए बीएसएनएल ने कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी पहल की है। स्वदेशी 4G तकनीक के विस्तार के तहत अब तक प्रदेश के करीब 2,600 गांवों को 4G नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। वहीं, नेटवर्क की पहुंच को और बढ़ाने के लिए 85 नए टावरों के सर्वेक्षण और निर्माण का काम जारी है। इनके पूरा होने के बाद करीब 200 और गांवों को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है। बीएसएनएल उत्तराखंड दूरसंचार परिमंडल के मुख्य महाप्रबंधक मनमोहन सिंह के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में प्रदेश में मोबाइल नेटवर्क के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर तेजी से काम हुआ है। इस दौरान उत्तराखंड टेलीकॉम सर्विस के तहत 1,795 नए 4G साइट्स शुरू किए गए। इनमें शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण, दुर्गम, पर्वतीय और सीमांत इलाके भी शामिल हैं। भारत सरकार की वित्तपोषित 4G सैचुरेशन परियोजना के तहत ऐसे गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां पहले मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं थी। परियोजना के तहत करीब 500 टावरों के माध्यम से 2,600 गांवों को नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। अब 85 नए टावरों का काम आगे बढ़ रहा है। इनके चालू होने से लगभग 200 अतिरिक्त गांवों में 4G सेवाएं पहुंचने की संभावना है। बीएसएनएल का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में बेहतर मोबाइल नेटवर्क सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। नेटवर्क पहुंचने से ऑनलाइन पढ़ाई, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और पर्यटन सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं की ऑनलाइन जानकारी तथा आवेदन की सुविधा भी आसानी से मिल सकेगी। दुर्गम और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों के लिए बीएसएनएल ने GSPS सैटेलाइट आधारित सेवा भी उपलब्ध कराई है। इस सेवा की खासियत यह है कि इसमें सामान्य मोबाइल टावर की जरूरत नहीं होती। सैटेलाइट फोन सीधे उपग्रह से कनेक्ट होकर वॉइस कॉल और एसएमएस की सुविधा दे सकता है। इससे ऊंचे पहाड़ी इलाकों, जंगलों और उन स्थानों पर संचार सुविधा मिल सकती है, जहां मोबाइल टावर लगाना बेहद मुश्किल है। बीएसएनएल के अनुसार सैटेलाइट फोन हैंडसेट की कीमत टैक्स समेत करीब 1.34 लाख रुपये है। प्रीपेड सेवा के तहत सरकारी ग्राहकों के लिए मासिक प्लान करीब 4,503 रुपये और वाणिज्यिक ग्राहकों के लिए करीब 7,507 रुपये निर्धारित किया गया है। सैटेलाइट फोन सेवा नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में उपयोगी होगी, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा से जुड़े निर्धारित प्रतिबंध लागू रहेंगे। विदेशी नागरिकों को यह सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। सुरक्षा कारणों से संवेदनशील क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। बीएसएनएल के अधिकारियों के मुताबिक स्वदेशी 4G तकनीक और सैटेलाइट आधारित संचार सेवाओं का विस्तार प्रदेश के डिजिटल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। खासकर सीमांत और पहाड़ी गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। ऐसे में 2,600 गांवों में पहुंचा 4G नेटवर्क उत्तराखंड के उन इलाकों के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे थे।