आर-पार की जंग: आज देहरादून में 'महाघेराव', सड़कों पर उतरेंगे उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारी

A decisive battle: 'Maha-Gherao' in Dehradun today; Uttarakhand statehood agitators to take to the streets.

देहरादून। उत्तराखंड राज्य गठन के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले राज्य आंदोलनकारी अपनी अनदेखी और लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरने जा रहे हैं। अपनी प्रमुख मांगों—तत्काल चिन्हीकरण और नौकरियों में 10% क्षैतिज आरक्षण को लेकर आज प्रदेशभर के आंदोलनकारी राजधानी देहरादून में जुटेंगे और जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय का ऐतिहासिक घेराव करेंगे। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति ने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए "देहरादून चलो" का नारा बुलंद किया है। आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं की, तो इस बार आंदोलन को बेहद उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के अध्यक्ष जगमोहन नेगी के नेतृत्व में आज आंदोलनकारियों का एक विशाल संयुक्त मार्च निकाला जाएगा, जो सीधे कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेगा। आंदोलनकारियों में सरकार की सुस्ती को लेकर गहरा आक्रोश है। संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा बीते 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के पवित्र अवसर पर सरकार ने बड़े जोर-शोर से घोषणा की थी कि अगले 6 महीने के भीतर राज्य के उन सभी आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर दिया जाएगा जो अब तक इससे वंचित हैं। आज इस घोषणा को 6 महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फाइलें जस की तस दबी हुई हैं। यहां तक कि अस्थायी राजधानी देहरादून में भी सैकड़ों सच्चे आंदोलनकारी आज भी अपने हक और पहचान के लिए भटक रहे हैं। धीरेंद्र प्रताप ने स्थानीय प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि देहरादून में जब से नए जिलाधिकारी आए हैं, तब से आंदोलनकारियों को केवल खोखले आश्वासन और तारीखें ही मिल रही हैं। राज्य गठन की लड़ाई लड़ने वाले वीर सेनानियों के चिन्हीकरण का मामला लंबे समय से अधर में लटका हुआ है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तत्काल संपूर्ण चिन्हीकरण: राज्य के सभी बचे हुए वास्तविक आंदोलनकारियों की पहचान कर उन्हें तुरंत चिन्हित किया जाए। सरकारी नौकरियों में आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण कानूनन तुरंत लागू किया जाए। सभी चिन्हित सेनानियों को सम्मानजनक पेंशन, मुफ्त चिकित्सा और अन्य सरकारी सुविधाएं बिना किसी प्रशासनिक हीलाहवाली के दी जाएं। दूसरी ओर, राज्य आंदोलनकारियों के इस बड़े आंदोलन और उग्र घेराव की चेतावनी को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी कार्यालय और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। कलेक्ट्रेट परिसर को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और बैरिकेडिंग की तैनाती की गई है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे। एलआईयू (इंटेलिजेंस) की टीमें भी आंदोलनकारियों के मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।