विधानसभा चुनाव 2026: पंजाब के रण में जेडीयू की एंट्री, नीतीश के चेहरे पर 'बिहार कनेक्शन' से बदलेगा समीकरण
पटना। आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर देश का सियासी पारा गरमा गया है। शह और मात के इस खेल में अब तक शांत दिख रही जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने पंजाब के राजनीतिक समर में उतरकर सबको चौंका दिया है। पंजाब की सत्ता पर काबिज होने की जंग में जदयू ने किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय अकेले दम पर ताल ठोकने का बड़ा फैसला किया है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी राज्य की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 45 चुनिंदा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की पुख्ता योजना बना चुकी है। हाल ही में संपन्न हुई जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में इस रणनीति पर गहन मंथन हुआ है। हालांकि, बिहार के शीर्ष नेताओं ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन पंजाब की जमीनी राजनीति में जदयू कार्यकर्ताओं की अचानक बढ़ी सक्रियता साफ संकेत दे रही है कि पार्टी वहां एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
पंजाब की धरती पर कदम रखने के पीछे जदयू की सबसे बड़ी ताकत बिहार और पंजाब का सदियों पुराना गहरा और अटूट रिश्ता है। सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली 'तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब' (बिहार) में स्थित है। इसके कारण पंजाब के सिख समाज का बिहार के साथ एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक जुड़ाव है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्रित्व काल में पटना साहिब में आयोजित गुरु गोविंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व के भव्य और ऐतिहासिक आयोजन ने पूरी दुनिया में बिहार की छवि को बदल कर रख दिया था। उस दौरान पंजाब से बिहार गए लाखों श्रद्धालुओं को जो सम्मान और व्यवस्था मिली, उसने पंजाबियों के दिलों में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के प्रति श्रद्धा और अटूट विश्वास की गहरी नींव रख दी। पार्टी अब इसी 'श्रद्धा और क्रेडिबिलिटी' को वोट बैंक में बदलने की उम्मीद कर रही है। धार्मिक जुड़ाव के अलावा जदयू की नजर पंजाब के मजबूत सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने पर भी है। पंजाब की कृषि, डेयरी और औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ काफी हद तक वहां दशकों से रह रहे और काम कर रहे बिहारी प्रवासियों पर टिकी है। राज्य की अर्थव्यवस्था में इस वर्ग का बहुत बड़ा योगदान है। जदयू इसी 'बिहार कनेक्शन' और अपने सामाजिक प्रभाव को अपनी सबसे बड़ी यूएसपी मानकर चल रही है। पार्टी को पूरा भरोसा है कि वह इन 45 सीटों पर न सिर्फ पारंपरिक दलों का खेल बिगाड़ेगी, बल्कि जीत का परचम भी लहराएगी। आने वाले दिनों में जब प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होगी और खुद नीतीश कुमार पंजाब के दौरे पर निकलेंगे, तब वहां का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय होने की उम्मीद है। देखना होगा कि बिहार का यह 'तीर' पंजाब के 'रण' में कितना सटीक निशाना लगा पाता है।