सरकार ने रिटायर कार्मिकों को पुनर्नियुक्ति या संविदा पर नियुक्ति देने पर कसी लगाम
उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने के बाद उन्हें पुनर्नियुक्ति या संविदा पर रखने की मनमानी पर लगाम कस दी है।कई विभागों में अफसर मनमाने ढंग से अपने चहेतों को पुनर्नियुक्ति देकर सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं।अलग अलग पद नामों से विभागों में इस तरह की नियुक्तियों का खेल चल रहा है।इस पर नकेल कसने के लिए मंगलवार को मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने अनियमित अनुबंध नियुक्तियों के खिलाफ शासनादेश जारी किया है।अब कोई भी नियुक्ति कार्मिक एवम सतर्कता विभाग की अनुमति के बिना नहीं होगी।बेहद अनिवार्य होने पर ही कार्मिक विभाग अनुमति देगा। लेकिन उसके लिए कड़ी शर्तें तय की गई हैं।शासन को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में संबंधित विभाग को प्रमाण पत्र देना होगा कि अनुबंध या पुनर्नियुक्ति पर पद को भरा जाना क्यों आवश्यक है।विभाग में कार्यरत अन्य किसी कार्मिक के सबंधित पद पर काम करने के लिए सक्षम न होने पर ही शासन अनुमति देगा।इतना ही नहीं अनुमति केवल 6 माह या अधिकतम एक साल के लिए होगी।जिन विभागों में विभागाध्यक्ष या अपर विभागाध्यक्ष के पद पूर्ण रूप से भरे हैं,वहां पुनर्नियुक्ति नहीं दी जाएगी।जिन विभागों में रिटायरमेंट की उम्र 62 वर्ष है वहां किसी भी स्थिति में पुनर्नियुक्ति नहीं दी जा सकती।बिना कार्मिक विभाग के पुनर्नियुक्ति देेने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी।सरकार ने अनियमित पुनर्नियुक्ति को कदाचार की श्रेणी में रखा है और नियुक्ति देने वाले संबंधित अधिकारी की वेतन से वसूली होगी।