उत्तराखंड:POCSO केस में पीड़िता का नाम और फोटो वायरल करना पड़ा महंगा,आरोपी पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
पिथौरागढ़ जिले में नाबालिग बालिका के अपहरण से जुड़े संवेदनशील मामले में सोशल मीडिया पर पीड़िता का नाम और फोटो सार्वजनिक करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। पिथौरागढ़ पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार अपहरण के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद कर लिया गया है। उपचार के लिए उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है, जबकि मामले में अग्रिम कानूनी कार्रवाई जारी है।
इसी दौरान पितरौटा निवासी धर्मेन्द्र लाल वर्मा पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग पीड़िता का नाम, छायाचित्र और मामले से जुड़ी भ्रामक एवं आपत्तिजनक जानकारी सार्वजनिक की। पुलिस का कहना है कि इस कृत्य से पीड़िता और उसके परिवार की निजता तथा सम्मान प्रभावित हुआ है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन प्रतिबंधित है। ऐसा करना पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों का उल्लंघन है।
पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ के निर्देश पर आरोपी धर्मेन्द्र लाल वर्मा के विरुद्ध धारा 72 बीएनएस तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 23(4) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी विभिन्न धाराओं में चार आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
पिथौरागढ़ पुलिस ने कहा कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर), यूट्यूब सहित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।, और मामले से संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने वाले अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने आमजन से अपील भी की है कि किसी भी नाबालिग पीड़ित या पीड़िता की पहचान, नाम अथवा फोटो सोशल मीडिया पर साझा न करें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।