हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि धामी सरकार ने उत्तराखंड की प्रचलित बाजार भाव के अनुसार कम से कम 1,00,000 करोड़ रूपये की सरकारी जमीनें और धरोहर संपत्तियां 60 से 90 साल के लिए निजी हाथों में औने-पौने दामों में सौंपने की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में भूमि बचाओ-धामी हटाओ अभियान शुरु किया है और राज्य के 11 स्थानों पर इन संपत्तियों पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि ये सभी निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिए। मंत्रिमंडल की शक्तियों का अकेले प्रयोग करने का मुख्यमंत्री को कोई अधिकार नहीं था और न ही यूआईआईडीबी अधिनियम उन्हें यह अधिकार देता है। उन्होंने बताया कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार लगभग 1,232 एकड़ भूमि यूआईआईडीबी और सिडकुल को देने के प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं, लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में देने की कार्यवाही चल रही है और लगभग 560 एकड़ और भूमि देने की प्रक्रिया जारी है। श्री आर्य ने आरोप लगाया कि जमीनें सौंपने की ऐसी हड़बड़ी थी कि सरकार को यह तक पता नहीं था कि जमीन किसकी है और कितनी है। नियोजन विभाग ने 15 जनवरी 2025 के शासनादेश में पटवाडांगर की 103 एकड़ जमीन को कृषि विभाग के स्वामित्व वाली बताकर उसमें से 23 एकड़ प्रीमियम रिसॉर्ट के लिए यूआईआईडीबी को दे दी। जबकि उस दिन इस जमीन की न पैमाइश हुई थी, न कोई अभिलेख था। लगभग आठ महीने बाद, 4 सितंबर 2025 को राजस्व विभाग ने अधिसूचना जारी कर पटवाडांगर गांव का सर्वेक्षण और अभिलेख बनाने का काम शुरु किया और 9 सितंबर 2025 को राजस्व परिषद ने जिलाधिकारी नैनीताल को लिखा कि यह 108 एकड़ भूमि वन विभाग एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस जमीन का कोई दर्ज मालिक ही नहीं था, उसे सरकार ने कृषि विभाग की बताकर दे दिया। यह गलती नहीं, जनता की आंखों में धूल झोंकना है। जो विभाग जमीन का मालिक ही नहीं, वह जमीन किसी को दे कैसे सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि सरकार के अपने कागजों में पटवाडांगर की इसी जमीन का मालिक हर बार बदलता रहा। अक्टूबर 2023 की बैठक में इसे जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से संबंधित भूमि और लगभग 60 एकड़ बताया गया, जून 2024 में कृषि एवं उद्यान विभाग की 80 एकड़, जनवरी 2025 के शासनादेश में कृषि विभाग की 103 एकड़, अगस्त 2025 की बैठक में जैव प्रौद्योगिकी परिषद् स्थित भूमि और सितंबर 2025 की अधिसूचना में 108 एकड़। विश्वविद्यालय के लिए भी कभी 30, कभी 15 और कभी 26.4 एकड़ लिखा गया। उन्होंने कहा कि चार कागज, चार मालिक, चार रकबे। सरकार को जमीन से नहीं, सिर्फ उसे होटल वालों तक पहुंचाने से मतलब था। पहले जमीन दी गई, पैमाइश बाद में शुरु हुई और अब उसी जमीन का 90 साल का टेंडर निकाल दिया गया।
उत्तराखण्डः नेता प्रतिपक्ष आर्य का धामी सरकार पर तीखा हमला! न पैमाइश, न अभिलेख, चार कागजों में चार मालिक और चार रकबे दिखाकर चहेतों को 90 साल के लिए बांटी जा रही जमीन
Author:Awaaz Desk
🕒 Last Updated:2026-11-05 05:28:49
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि धामी सरकार ने उत्तराखंड की प्रचलित बाजार भाव के अनुसार कम से कम 1,00,000 करोड़ रूपये की सरकारी जमीनें और धरोहर संपत्तियां 60 से 90 साल के लिए निजी हाथों में औने-पौने दामों में सौंपने की पूरी तैयारी कर ली है।

उत्तराखण्डः नेता प्रतिपक्ष आर्य का धामी सरकार पर तीखा हमला! न पैमाइश, न अभिलेख, चार कागजों में चार मालिक और चार रकबे दिखाकर चहेतों को 90 साल के लिए बांटी जा रही जमीन (सांकेतिक तस्वीर)
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⏱️ 30-Sec Glance- नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि धामी सरकार ने उत्तराखंड की प्रचलित बाजार भाव के अनुसार कम से कम 1,00,000 करोड़ रूपये की सरकारी जमीनें और धरोहर संपत्तियां 60 से 90 साल के लिए निजी हाथों में औने-पौने दामों में सौंपने की पूरी तैयारी कर ली है।
- उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में भूमि बचाओ-धामी हटाओ अभियान शुरु किया है और राज्य के 11 स्थानों पर इन संपत्तियों पर रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया है।
- उन्होंने कहा कि ये सभी निर्णय मुख्यमंत्री ने अकेले लिए।
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