उत्तराखंड: बंगाली समाज की मांगों पर सरकार की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश, दुर्गा पूजा के बाद देहरादून में बड़े उग्र आंदोलन की चेतावनी
रुद्रपुर। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद में निवास करने वाले बंगाली समाज की विभिन्न प्रमुख मांगों को लेकर शासन-प्रशासन की बेरुखी अब बड़े आंदोलन का रूप लेती नजर आ रही है। बंगाली कल्याण समिति के नेतृत्व में पिछले महीने हुए उग्र प्रदर्शन और 10 दिवसीय धरने के एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद, धामी सरकार की ओर से कोई ठोस सकारात्मक पहल न होने पर समाज में भारी नाराजगी है।
ऊधम सिंह नगर में बंगाली समाज की विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन एक बार फिर तेज होने के आसार हैं। बंगाली कल्याण समिति के नेतृत्व में 20 सितंबर को किए गए प्रदर्शन के एक महीने बाद भी समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया है। इससे समाज में नाराजगी बढ़ रही है। समिति ने संकेत दिए हैं कि दुर्गा पूजा समाप्त होने के बाद सार्वजनिक बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में बंगाली समाज देहरादून पहुंचकर गांधी पार्क में धरना देने की तैयारी कर रहा है। आपको बता दें बंगाली समाज की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण, बंगाली बहुल क्षेत्रों के विद्यालयों में बंगाली भाषा में पढ़ाई की सुविधा, विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और ऊधम सिंह नगर में बंगाली समाज के परिवारों के निरस्त किए गए पट्टों की बहाली शामिल है। इन मांगों को लेकर 20 सितंबर को बंगाली कल्याण समिति के नेतृत्व में समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया था। इससे पहले दस दिवसीय धरना भी दिया गया था। प्रदर्शन के दौरान सरकार को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर निर्धारित समय में कार्रवाई करने की अपील की गई थी।
इस पूरे मामले में अब बंगाली कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी ने बताया कि बंगाली समाज का प्रमुख पर्व दुर्गा पूजा चल रहा है। इस समय समाज के लोग धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में व्यस्त हैं। पर्व समाप्त होने के बाद सार्वजनिक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन की अगली रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उनकी वार्ता नहीं हो पाई है। जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मांगों को रखने का प्रयास किया जाएगा। यदि इसके बाद भी सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है तो समाज देहरादून के गांधी पार्क में धरना देने के लिए बाध्य होगा। अधिकारी के मुताबिक, रुद्रपुर, शक्तिफार्म और गदरपुर विधानसभा क्षेत्रों से लोगों को एकत्र कर देहरादून ले जाने की तैयारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक धरना जारी रखने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारी का कहना है कि कई बार मांगें उठाने के बावजूद समाधान नहीं निकलने से अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत महसूस हो रही है।
वही दूसरी ओर, बंगाली समाज की मांगों को लेकर सरकार के स्तर पर बातचीत होने की जानकारी भी सामने आई है। शक्तिफार्म से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री सौरभ बहुगुणा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। इस बातचीत में बंगाली भाषा को विद्यालयों में पढ़ाए जाने के विषय पर सहमति बनने की बात कही जा रही है। हालांकि, अन्य मांगों विशेषकर छात्रवृत्ति, आरक्षण और निरस्त पट्टों की बहाली पर किसी ठोस निर्णय की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। शक्तिफार्म से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं को अब भी उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन विषयों पर समिति गठित कर सकती है या आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि, बाकी मांगों पर सरकार का रुख क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। उधर पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन ने बंगाली कल्याण समिति को समाज की सर्वमान्य संस्था बताते हुए कहा कि समिति के नेतृत्व में समाज के हित में जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह उसके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के बाद समिति की रणनीति के अनुसार समाज आगे की कार्रवाई करेगा। महाजन ने छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विद्यार्थियों को लंबे समय से छात्रवृत्ति नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने सरकार से बंगाली समाज की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने और उनके समाधान के लिए कदम उठाने की अपील की। वही बंगाली समाज की मांगों को लेकर अब दुर्गा पूजा के बाद होने वाली बैठक और मुख्यमंत्री से संभावित वार्ता पर नजरें टिकी हैं। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो देहरादून में आंदोलन का अगला चरण बन सकता है। फिलहाल समिति ने अंतिम कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलन को टालने के लिए कोई ठोस पहल होती है या नहीं।