Oct 14, 2026 Login
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पंजाब में बिजली संकट पर हाहाकार: सड़कों पर उतरे किसान और उद्योगपति, घिरी सरकार ने पावरकॉम सीएमडी को हटाया

Uproar over Punjab's power crisis: Farmers and industrialists take to the streets; cornered government removes Powercom CMD.

चंडीगढ़। पंजाब में भीषण बिजली कटौती को लेकर जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। अघोषित बिजली कटों से परेशान किसान, व्यापारी और आम लोग सड़कों पर उतर आए हैं। बढ़ते जनआक्रोश और चौतरफा सियासी दबाव के बीच राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए पीएसपीसीएल (पावरकॉम) के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को पद से हटा दिया है। उनकी जगह वरिष्ठ अधिकारी गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त किया गया है। 

पंजाब में बिजली कटौती को लेकर सोमवार को सड़कों से लेकर सियासी गलियारों तक घमासान मचा रहा। बिजली संकट से परेशान किसान, उद्योगपति और राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर सड़क पर उतर आए। जगह-जगह धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम की स्थिति बन गई। बढ़ते विरोध के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के सीएमडी आईएएस बसंत गर्ग को पद से हटा दिया। उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी नियुक्त किया गया है। हालांकि, विरोध के बीच बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया कि राज्य में बिजली संकट पर अब काबू पा लिया गया है। उनके अनुसार 13 सितंबर सुबह सात बजे से बिजली की कमी के कारण कोई कट नहीं लगाया गया है और आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक तथा कृषि क्षेत्र को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मंत्री ने बताया कि दो निजी ताप विद्युत संयंत्रों में आई तकनीकी खराबियों को दूर कर लिया गया है। एक अन्य निजी बिजली संयंत्र से करीब 100 मेगावाट बिजली मिलनी भी शुरू हो गई है। किसानों के लिए सिंचाई बिजली की उपलब्धता आठ से बढ़ाकर 10 घंटे किए जाने का दावा किया गया है। पटियाला में सोमवार को बिजली संकट के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता पावरकॉम मुख्यालय की ओर बढ़े। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछारें कीं। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। दूसरी ओर जगरांव में किसानों ने करीब चार घंटे धरना देने के बाद जगरांव-जालंधर मार्ग जाम कर दिया। फरीदकोट में भी किसानों ने पावरकॉम कार्यालय का घेराव किया। किसानों का कहना था कि बिजली की उपलब्धता में कमी का सीधा असर खेती और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। लुधियाना में बिजली कटौती से परेशान डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम कर दिया। उद्योगपतियों ने आरोप लगाया कि उन्हें रोजाना करीब 14 घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इससे उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और श्रमिक भी फैक्टरियां छोड़कर जा रहे हैं। उद्योगपतियों ने बिजली की दर करीब आठ रुपये से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट होने का दावा किया। उनके अनुसार बिजली खर्च बढ़ने से एक फैक्टरी का बिल 15 लाख रुपये से बढ़कर करीब 18 लाख रुपये तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि बिजली संकट ने पहले से दबाव झेल रहे उद्योगों की मुश्किल और बढ़ा दी है। पंजाब में सोमवार को बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। इससे पहले 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज की गई थी। मांग बढ़ने के बीच करीब 1,478 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित रही। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट की कुछ इकाइयां कम क्षमता पर चलीं, जबकि पानी की कमी के कारण हाइडल पावर की पांच इकाइयां बंद रहीं। इसके बावजूद पावरकॉम का दावा है कि उद्योग, शहर और गांवों में बिजली कट नहीं लगाया गया। बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने संकट के लिए केंद्र पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कोयले की आपूर्ति में कमी और पंजाब के हिस्से की करीब 1,000 मेगावाट बिजली नहीं मिलने से स्थिति चुनौतीपूर्ण हुई। मंत्री के मुताबिक राज्य के पास करीब 17,000 मेगावाट तक की मांग पूरी करने की क्षमता है। सरकार के इस दावे और जमीन पर विरोध-प्रदर्शनों के बीच पंजाब में बिजली संकट अब बड़ा सियासी मुद्दा बनता नजर आ रहा है।