UGC की जगह अब होगा VBSA:उच्च शिक्षा नियमन में ऐतिहासिक सुधार, IIT-IIM भी पहली बार आएंगे एक दायरे में!

UGC to be replaced by VBSA: Historic reforms in higher education regulation, IITs and IIMs will also come under a single regulatory framework for the first time!

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। दशकों से विश्वविद्यालय शिक्षा के नियमन की जिम्मेदारी निभा रहा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) अब नए ढांचे में समाहित होने जा रहा है। सरकार UGC की जगह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) की स्थापना करने जा रही है, जो देश के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एकीकृत नियामक संस्था होगी।

UGC की स्थापना 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नेतृत्व में हुई थी। बाद में वर्ष 1956 में संसद के अधिनियम के तहत इसे वैधानिक दर्जा मिला। बीते कई दशकों में UGC ने विश्वविद्यालय शिक्षा के मानक तय करने, उन्हें बनाए रखने और संस्थानों को मान्यता देने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि बदलती जरूरतों और नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकार ने नियमन व्यवस्था को एकीकृत करने का निर्णय लिया है।

एक छत के नीचे आएंगे सभी नियामक

नई व्यवस्था के तहत UGC के साथ-साथ अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) का विलय कर VBSA का गठन किया जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बताया जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, अलग-अलग नियामक संस्थाओं के कारण नियमों में दोहराव, देरी और भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जिसे खत्म करने के लिए यह सुधार आवश्यक था।

VBSA के लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और शिक्षक शिक्षा संस्थानों का संचालन एक ही ढांचे के तहत होगा। इससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

पहली बार IIT और IIM भी होंगे शामिल

इस नई व्यवस्था की एक अहम खासियत यह है कि IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी पहली बार एक साझा नियामक दायरे में आएंगे। अब तक ये संस्थान अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते थे। VBSA के बाद देश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों पर समान गुणवत्ता और नियामक मानक लागू होंगे।

तीन परिषदों पर आधारित होगा ढांचा

VBSA के अंतर्गत तीन प्रमुख परिषदें कार्य करेंगी—

विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद, जो नियामक भूमिका निभाएगी।

विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद, जो मान्यता और प्रत्यायन से जुड़े कार्य देखेगी।

विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद, जो शैक्षणिक मानकों का निर्धारण करेगी।


सभी विश्वविद्यालयों पर समान नियम

VBSA के नियम केंद्र और राज्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ निजी, ओपन, डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होंगे। अब तक जहां सामान्य विश्वविद्यालय UGC, तकनीकी संस्थान AICTE और शिक्षक शिक्षा संस्थान NCTE के अधीन आते थे, वहीं अब यह पूरा दायित्व एक ही संस्था निभाएगी। इससे शिक्षा प्रणाली अधिक सरल, स्पष्ट और प्रभावी बनने की उम्मीद है।

सख्त दंड प्रावधान भी शामिल

नई व्यवस्था में नियमों के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। VBSA को अधिनियम या नियमों का पालन न करने पर 10 लाख से 75 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। वहीं बिना अनुमति के उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने पर दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति

VBSA और उसकी तीनों परिषदों के अध्यक्षों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जिसे बढ़ाकर अधिकतम पांच वर्ष तक किया जा सकता है। प्रत्येक परिषद में 14 सदस्य होंगे। कर्तव्य में लापरवाही या गंभीर कारणों के आधार पर राष्ट्रपति को अध्यक्ष या सदस्यों को हटाने का अधिकार भी होगा। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार आयोग या परिषदों को भंग कर सकेगी। VBSA के गठन को देश की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक बड़े संरचनात्मक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य नियमन को सरल बनाना और शिक्षा की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर के अनुरूप मजबूत करना है।