तमिलनाडु में 'थलापति' युग का उदय: विजय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, छह दशक पुराना द्रविड़ वर्चस्व टूटा
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में आज एक ऐसा ऐतिहासिक मोड़ आया,जिसने दशकों पुराने सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया। सिनेमा के पर्दे पर राज करने वाले 'थलापति' विजय ने अब सूबे की सत्ता की कमान संभाल ली है। चेन्नई के खचाखच भरे जवाहर लाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में एक भव्य समारोह के दौरान राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
यह क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 60 साल बाद तमिलनाडु में किसी गैर-द्रविड़ दल का मुख्यमंत्री बना है। विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कझगम अपने पहले ही चुनावी रण में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस, वीसीके और वामदलों के रणनीतिक समर्थन के साथ विजय ने बहुमत के जादुई आंकड़े (118) को पार कर सत्ता के गलियारों में अपनी धमक पैदा कर दी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूरा स्टेडियम 'थलापति' के नारों से गूंज उठा। जब विजय मंच पर शपथ ले रहे थे, तब उनके पिता और प्रसिद्ध निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर अपने बेटे की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को देख बेहद भावुक नजर आए। इस समारोह में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित देश के कई बड़े राजनेताओं ने शिरकत की, जो विजय की बढ़ती राजनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री विजय के साथ नौ नवनिर्वाचित विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। नई कैबिनेट में अनुभवी चेहरों और युवाओं का संतुलन देखने को मिला है। शपथ लेने वाले मंत्रियों में शामिल हैं। सिल्वर स्क्रीन से सत्ता के शिखर तक का विजय का यह सफर आसान नहीं रहा है। उनके सामने अब राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और अपने लोकलुभावन वादों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, समर्थकों का मानना है कि जिस तरह उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए आम जनता के दिलों में जगह बनाई, उसी तरह वे सुशासन के जरिए राज्य की तस्वीर भी बदलेंगे। आज की इस शपथ के साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में 'द्रविड़ राजनीति बनाम अन्य' की एक नई बहस शुरू हो गई है। क्या विजय तमिलनाडु के लिए वही करिश्मा कर पाएंगे जो कभी एमजीआर ने किया था? यह तो वक्त बताएगा,लेकिन फिलहाल चेन्नई की हवाओं में बदलाव की खुशबू साफ महसूस की जा सकती है।