पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर देश ने किया नमन: पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कांग्रेस ने वीडियो साझा कर कहा- डरो मत
नई दिल्ली। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें शिद्दत से याद कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास में उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इस मौके पर अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (ट्विटर) पर एक बेहद खास संदेश साझा किया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों का ध्यान खींचा है।
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर बुधवार को पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री से लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं तक ने सोशल मीडिया के जरिए नेहरू को याद करते हुए उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। इस दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा साझा किया गया “डरो मत” संदेश वाला वीडियो विशेष रूप से चर्चा का केंद्र बना रहा। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 28 सेकेंड का एक वीडियो साझा किया, जिसमें पंडित नेहरू के 15 अगस्त 1960 को लाल किले की प्राचीर से दिए गए भाषण का अंश शामिल था। वीडियो में नेहरू कहते सुनाई देते हैं, “दुनिया में बहुत सारे ऐब और खराबियां होती हैं, लेकिन सबसे बड़ा गुनाह और सबसे बड़ी कमजोरी डर है।” कांग्रेस ने इस वीडियो को “डरो मत” कैप्शन के साथ पोस्ट किया, जिसे राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया मिली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पंडित नेहरू को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी और समावेशी, सौहार्दपूर्ण तथा प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। राहुल गांधी ने कहा कि स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक सोच पर आधारित नेहरू का दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी नेहरू को याद करते हुए कहा कि उनकी स्थायी विरासत आज भी भारत की आत्मा का मार्गदर्शन करती है। खरगे ने कहा कि नेहरू ने स्वतंत्रता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और वैज्ञानिक सोच के आदर्शों को जीवनभर मजबूती से आगे बढ़ाया। उन्होंने पंडित नेहरू को “हिंद के जवाहर” बताते हुए कहा कि सत्य, एकता और शांति के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी। पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा घर पर प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने हैरो और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। बाद में उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की। भारत लौटने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए और जल्द ही कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। महात्मा गांधी के नेतृत्व में नेहरू ने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने “पूर्ण स्वराज” को अपना लक्ष्य घोषित किया था। स्वतंत्रता के बाद नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने और उन्होंने आधुनिक भारत की नींव रखने में अहम योगदान दिया। लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, औद्योगिक विकास को गति देने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक मानी जाती है। बच्चों के प्रति उनके विशेष स्नेह के कारण हर साल 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। 27 मई 1964 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी राजनीतिक और वैचारिक विरासत आज भी भारतीय लोकतंत्र में जीवित मानी जाती है।