एसआईआर पर आज सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला,याचिकाओं में मतदाता सूची पुनरीक्षण को दी है चुनौती
नई दिल्ली। देश के करोड़ों वोटरों के भविष्य और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाने जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना अंतिम निर्णय देगी। इस फैसले से तय होगा कि चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है या नहीं।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाने और इसे त्रुटिरहित बनाने के लिए SIR अभियान शुरू किया था। विवाद की मुख्य वजह आयोग की एक सख्त शर्त है। जिन मतदाताओं का नाम 2002 (या कुछ राज्यों में 2003) की वोटर लिस्ट में नहीं था, उन्हें सूची में नाम शामिल कराने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से अपना पारिवारिक संबंध साबित करना होगा, जिसका नाम उस पुरानी सूची में दर्ज था। इस शर्त के खिलाफ पिछले साल जून में (विशेषकर बिहार में अभियान शुरू होने के बाद) कई याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नियम गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए बेहद कड़ा है। उनके पास दशकों पुराने दस्तावेजी प्रमाण मिलना मुश्किल है, जिससे वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 का उल्लंघन है। लंबी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और प्रभावित मतदाताओं को राहत देने के लिए कई अंतरिम निर्देश जारी किए थे। बड़ा बदलाव: शुरुआत में चुनाव आयोग ने सत्यापन के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस प्रक्रिया में पहचान सत्यापन के अन्य प्रमुख विकल्पों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया ताकि आम जनता को राहत मिल सके। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लोकतंत्र में 'एक नागरिक, एक वोट' का सिद्धांत बनाए रखने के लिए यह अभियान जरूरी है। फर्जी और अयोग्य मतदाताओं को हटाए बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। यह अभियान बिहार से शुरू होकर पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैल चुका है। पीठ ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद बीती 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जो आज सार्वजनिक किया जाएगा। इस फैसले पर पूरे देश की राजनीतिक पार्टियों और आम नागरिकों की निगाहें टिकी हुई हैं।