चौंकाने वाले खुलासा: पाकिस्तान में जन्म,यूपी में ठिकाना! नाजिया ने दो नामों से बनवाए वोटर कार्ड, 23 साल बाद गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

Shocking revelation: Born in Pakistan, settled in Uttar Pradesh! Nazia obtained voter cards under two names; her arrest after 23 years caused a stir.

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें पाकिस्तान में जन्मी और भारत में रह रही महिला पर दो अलग-अलग नामों से वोटर कार्ड बनवाने समेत फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के आरोप लगे हैं। करीब 23 साल पुराने इस मामले में देहली गेट थाना पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए सबा मसूद उर्फ नाजिया को गिरफ्तार कर लिया।

आरोप है कि पाकिस्तान निवासी सबा मसूद ने वर्ष 2003 में दो अलग-अलग नामों से मतदाता पहचान पत्र बनवाए थे। वह लगभग 37 वर्ष पहले मेरठ के नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद से निकाह के बाद भारत आई थी। प्राथमिकी के अनुसार, वर्ष 1988 में फरहत मसूद पाकिस्तान के लाहौर गए थे, जहां उन्होंने सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया से निकाह किया। इसके बाद वह लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत आई और यहीं रहने लगी। दंपती के तीन संतान हुए, जिनमें दो बेटों का जन्म भारत में हुआ। वर्ष 1993 में नाजिया पाकिस्तान गईं, जहां 25 मई 1993 को उनकी बेटी एमन फरहत का जन्म हुआ। आरोप है कि वह अपनी बेटी को पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भारत लेकर आईं और यहां उसके दस्तावेज तैयार कराए। एमन का दाखिला कैंट क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल में भी कराया गया। इस पूरे प्रकरण में देहली गेट की कोठी अतानस निवासी रुखसाना ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में न केवल फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप लगाया गया है, बल्कि नाजिया के पिता के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने का संदेह भी व्यक्त किया गया है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि देहली गेट पुलिस और खुफिया विभाग की संयुक्त टीम ने महिला से पूछताछ की और उसके दस्तावेजों की जांच की। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में दो अलग-अलग नाम पाए जाने के बाद गिरफ्तारी की गई। पुलिस का कहना है कि महिला ने बिना सूचना दिए सहारनपुर सहित अन्य स्थानों की यात्राएं भी कीं, जिससे विदेशी अधिनियम की धाराएं बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। हालांकि जांच के दौरान फर्जी पासपोर्ट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) में उसका नाम मतदाता सूची से हटाया गया था या नहीं। बेटी एमन फरहत के खिलाफ अभी तक ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 336(3) (इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में जालसाजी) और 338 (मूल्यवान दस्तावेज या संपत्ति से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन धाराओं में दोष सिद्ध होने पर सात वर्ष से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, आरोपी पक्ष का कहना है कि यह मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है और उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और आवश्यक साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। करीब दो दशक पुराने इस मामले में हुई गिरफ्तारी से इलाके में चर्चा का माहौल है और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।