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राजनीतिक शोक:दिग्गज नेता शरद यादव का हुआ निधन!7 बार लोकसभा सांसद,जदयू और सपा में खेला राजनीतिक शतरंज!कौन होगा अब शरद की राजनीतिक विरासत को संभालने वाला

Political mourning: Veteran leader Sharad Yadav passed away! 7 times Lok Sabha MP, played political chess in JDU and SP! Who will now handle Sharad's political legacy

India:13/1/2023

 

राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले जदयू नेता रहे और सपा नेता शरद यादव का गुरुवार रात निधन हो गया,इसकी जानकारी उनकी बेटी सुभाषिनी शरद यादव ने ट्वीट कर दी है।उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि "पापा नही रहे"।

 

गुरुवार देर रात शरद यादव का पार्थिव शरीर एंबुलेंस से दिल्ली में छतरपुर स्थित आवास पर लाया गया. यहां 5 वेस्टर्न डीएलएफ में शुक्रवार को दिनभर पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा.

 

शरद यादव को सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे काफी समय से गुर्दे की बीमारी से भी जूझ रहे थे, लेकिन उन्‍होंने दम तोड़ दिया और इस दुनिया को अलविदा कह चले। इस दौरान शरद यादव के दामाद राज कमल राव ने जानकारी देते हुए बताया कि, ''उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। हम उन्हें अस्पताल ले गए। वहां पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उन्हें किडनी की समस्या थी और डायलिसिस पर थे। उनके पार्थिव शरीर को मध्य प्रदेश में उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।''

तो वहीं, शरद यादव के निधन की खबर सामने आते ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

आपको बता दें कि शरद यादव सात बार लोकसभा के सांसद रहे है,साथ ही वो केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं. वे समाजवादी विचारों के मुखर समर्थक थे और डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों से काफी प्रभावित थे. शरद यादव के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य बड़े नेताओं ने शोक जताया और श्रद्धांजलि दी है.

वही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू नेता शरद यादव को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार से मिले। इस दौरान उन्‍होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह भी कहा, ''मैंने शरद यादव जी से राजनीति के बारे में बहुत कुछ सीखा है, वह आज हमारे बीच नहीं रहें तो काफी दु:ख हो रहा है। उन्होंने कभी अपना सम्मान नहीं खोया क्योंकि राजनीति में सम्मान खोना बहुत आसान होता है।''

 

आपको बता दें कि शरद यादव के बच्चे हैं, बेटी सुभाषिनी और बेटा शांतनु है,कयास लगाए जा रहे है कि अब शरद यादव के बाद उनकी बेटी सुभाषिनी ही उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगी।सुभाषिनी राजनीति में पहले से ही सक्रिय हैं और कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हैं. हाल ही में वह राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में भी खासी सक्रिय देखी गईं. सबसे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश, राजस्थान में यात्रा जॉइन की. उसके बाद हरियाणा और पंजाब में भी यात्रा में शामिल हुईं. सुभाषिनी ने पिता शरद यादव से राजनीति सीखी है और उनके विचारों को आगे बढ़ाने की बात करती हैं.

पिछले साल 31 मई 2022 को जब शरद यादव ने दिल्ली में 7, तुगलक रोड वाला सरकारी आवास खाली किया, तब सुभाषिनी ने ही ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी. शरद यादव इस बंगले में करीब 22 साल तक रहे. इससे पहले उन्होंने लुटियंस जोन में भी काफी वक्त बिताया. शरद यादव अपना सरकारी आवास छोड़ते वक्त कहा था- इस घर से कई लड़ाइयां लड़ी गई हैं. यहां पर कई सारी यादें जुड़ी हैं.

शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव ने ट्वीट में कहा था- "तुगलक रोड पर 23 साल की सफल यात्रा को समाप्त करते हुए 48 साल के शुद्ध, समर्पित और निस्वार्थ योगदान समाज के उत्थान के लिए रहा. अब नई शुरुआत की प्रतीक्षा में"

सुभाषिनी यादव 2020 विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस में शामिल हो गई थीं. उन्होंने बिहारीगंज सीट से चुनाव भी लड़ा था. हालांकि, हार गई थीं. चुनावी कैंपेनिंग में राहुल गांधी के वोट मांगने के बाद सुभाषिनी यादव ने एक इमोशनल पोस्ट लिखा था. जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे राहुल गांधी ने बीमार पिता के नहीं पहुंच पाने की स्थिति में उनको बहन बताया और हौसला-अफजाई की. सुभाषिनी यादव की शादी हरियाणा में एक राजनीतिक परिवार में हुई है. वे प्रियंका गांधी और राहुल गांधी की काफी करीबी मानी जाती हैं.

शरद यादव का बिहार की मधेपुरा लोकसभा सीट से खासा लगाव रहा है. अगस्त 2017 में नीतीश कुमार से अनबन के बाद जदयू से बाहर आए शरद यादव ने लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का गठन किया था. वे 2019 के चुनाव में महागठबंधन के हिस्सा भी रहे और मधेपुरा से चुनाव लड़े. लेकिन, हार गए थे. बताते हैं कि शरद चाहते थे कि इस बार मधेपुरा से उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़े. ये इच्छा उनकी वर्षों से थी. हालांकि, तब पारिवारिक सदस्य की राजनीति में एंट्री नहीं हुई थी. एक साल बाद 2020 में बेटी सुभाषिनी कांग्रेस में शामिल हुईं तो उन्होंने मधेपुरा की बिहारीगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था.