टिहरी की लहरों पर बोटिंग कर सकते हैं पीएम मोदी! विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड को मिलेगी 8000 करोड़ की सौगात,प्रस्तावित जनसभा के कई मायने
टिहरी। देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन की सुगबुगाहट ने सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। खबर है कि प्रधानमंत्री जल्द ही टिहरी बांध की विशाल झील के किनारे कोटी कॉलोनी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। लेकिन इस बार चर्चा केवल भाषण की नहीं, बल्कि टिहरी झील में प्रधानमंत्री के 'बोटिंग' एडवेंचर की भी है। माना जा रहा है कि पीएम मोदी कोटी कॉलोनी से डोबरा-चांठी पुल तक झील की लहरों पर सफर कर उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान देंगे।
प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। वे टिहरी बांध की 1000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर सकते हैं। लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह देश की पहली 'वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज' परियोजना है। इसके शुरू होते ही टिहरी बांध की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 2400 मेगावाट हो जाएगी, जो ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। प्रशासनिक अमला प्रधानमंत्री की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर 'वार मोड' में है। गुरुवार को टीएचडीसी के मुख्य महाप्रबंधक और जिले के आला अधिकारियों ने कोटी कॉलोनी क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी कुछ समय झील में संचालित क्रूज बोट पर बिता सकते हैं। यही नहीं, प्रधानमंत्री की 'लोकल फॉर वोकल' मुहिम को धार देने के लिए प्रशासन कोटी कॉलोनी के आसपास किसी होमस्टे में उनके अल्प प्रवास की संभावनाएं तलाश रहा है। सुरक्षा एजेंसियां मानकों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ होमस्टे का चयन करने में जुटी हैं, ताकि उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और आतिथ्य का संदेश दुनिया भर में जाए। अगले वर्ष उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस दौरे के गहरे मायने हैं। टिहरी और उत्तरकाशी जिलों की कुल 9 विधानसभा सीटों में से वर्तमान में 7 पर भाजपा का कब्जा है। प्रतापनगर और यमुनोत्री की सीटों पर विपक्ष का दबदबा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोटी कॉलोनी की जनसभा के जरिए प्रधानमंत्री न केवल अपने कैडर में जोश भरेंगे, बल्कि पूरे गढ़वाल मंडल को साधने की कोशिश करेंगे। प्रधानमंत्री के आने की खबर से टिहरी की जनता की उम्मीदें भी परवान चढ़ रही हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की आस लगाए बैठे हैं। बांध प्रभावितों की समस्याओं पर पीएम के रुख का इंतजार है। इस समुदाय को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग पर प्रधानमंत्री कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। पर्यटन और बुनियादी ढांचे के लिए विशेष पैकेज की उम्मीद। प्रधानमंत्री की प्रस्तावित जनसभा को लेकर टीएचडीसी ने कई समितियां बना दी हैं। एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने झील में संचालित बार्ज बोट और क्रूज की सुरक्षा का परीक्षण किया है। अधिकारियों का कहना है कि टिहरी झील और बांध का यह दौरा उत्तराखंड के विकास की नई इबारत लिखेगा। प्रधानमंत्री मोदी का टिहरी दौरा विकास, पर्यटन और राजनीति का एक त्रिकोणीय संगम होने जा रहा है। जहां एक ओर 8,000 करोड़ की बिजली परियोजना से उत्तराखंड 'ऊर्जा प्रदेश' के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, वहीं झील में पीएम की बोटिंग उत्तराखंड को दुनिया का अगला बड़ा 'वाटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन' बना सकती है।