बिहार में नया नियम: अब स्कूलों में छात्रों की संख्या तय करेगी गुरुजी की कुर्सी, हर 30 बच्चों पर होगा एक शिक्षक

New rule in Bihar: Student numbers in schools will now determine teacher allocation; there will be one teacher for every 30 students.

पटना।बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और क्रांतिकारी फैसला लिया है। राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में अब शिक्षकों की नियुक्ति, तैनाती और ट्रांसफर-पोस्टिंग पूरी तरह से छात्रों की वास्तविक संख्या (नामांकन) के आधार पर की जाएगी।

शिक्षा विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक,अब प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की अनिवार्यता होगी, जबकि माध्यमिक स्तर पर विषयों के अनुसार अलग-अलग शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी। प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर की ओर से इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बिहार शिक्षा विभाग ने यह कदम 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' और 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए उठाया है। विभाग की हालिया समीक्षा में सामने आया था कि राज्य के कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुपात में न्यूनतम शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कुछ जगहों पर छात्र कम और शिक्षक ज्यादा हैं। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सचिव की मंजूरी के बाद नया शिक्षक निर्धारण मानक लागू किया गया है। नई व्यवस्था के तहत कक्षा 1 से 5 तक के प्राइमरी स्कूलों के लिए हर 30 छात्र पर एक शिक्षक का अनुपात तय किया गया है। मिडिल स्कूलों (कक्षा 6 से 8) के लिए विभाग ने विषयों की महत्ता को देखते हुए विशेष मानक तय किए हैं। अब हर स्कूल में विज्ञान, गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा (हिंदी) के एक-एक शिक्षक अनिवार्य रूप से होंगे। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि शिक्षक निर्धारण की गणना के लिए कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 को दो अलग-अलग शैक्षणिक इकाई (यूनिट) माना जाएगा और दोनों के लिए अलग-अलग अनुपात लागू होंगे। लेकिन, प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कक्षा 1 से 8 तक के पूरे प्रारंभिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद केवल एक ही रहेगा। यानी दो अलग-अलग अनुपात होने के बावजूद स्कूल की कमान एक ही हेडमास्टर के हाथ में होगी।