नैनीताल की 'लाइफलाइन'आईसीयू में,मिलती रही डेडलाइन!लोअर मॉल रोड का काम अधूरा,अपर मॉल रोड पर भी खतरे की घंटी,व्यापार मंडल अध्यक्ष ने प्रशासन और सरकार पर साधा निशाना
नैनीताल की पहचान और शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोअर मॉल रोड का स्थायी उपचार दो पर्यटन सीजन गुजर जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। पहले माइक्रो पाइलिंग के जरिए सड़क को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की योजना बनाई गई, लेकिन डिजाइन सफल नहीं होने पर पूरी कार्ययोजना बदलनी पड़ी। नतीजा यह है कि महीनों बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है और शहर के लोग जाम, धंसाव और अनिश्चितता की मार झेल रहे हैं।
नयना देवी व्यापार मंडल के अध्यक्ष पुनीत टंडन ने लोक निर्माण विभाग और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले सितंबर से सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन दो पर्यटन सीजन गुजरने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय व्यापारियों, पर्यटकों और आम नागरिकों को उठाना पड़ा है।
टंडन के अनुसार प्रशासन ने पहले मार्च तक काम पूरा करने की समयसीमा दी थी। बाद की बैठकों में विभागीय अधिकारियों ने दावा किया कि तकनीकी समस्या का समाधान हो चुका है, पर्याप्त बजट उपलब्ध है और एक महीने के भीतर कार्य पूरा कर दिया जाएगा। लेकिन 21 मई को हुई मुलाकात में विभाग ने फंड की कमी की बात कही। उस समय 51 में से केवल 11 पाइलिंग ही पूरी हो सकी थी। तब यह आश्वासन दिया गया था कि प्रतिदिन एक पाइलिंग कर एक महीने में पूरा कार्य समाप्त कर दिया जाएगा, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मौके पर काम की रफ्तार सवालों के घेरे में है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य वास्तव में तेजी से चल रहा होता तो लोगों को भी संतोष होता, लेकिन अब तो आसपास की दुकानों में लगे सीसीटीवी कैमरे भी गवाही दे सकते हैं कि लगातार काम होता दिखाई नहीं दे रहा है।
व्यापार मंडल ने अब 15 अगस्त तक की अंतिम समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी है कि यदि तब तक लोअर और अपर मॉल रोड पर यातायात सुचारू नहीं हुआ तो स्थानीय नागरिक सड़क पर लेटकर आंदोलन करेंगे और मुख्यमंत्री से स्वयं मौके पर आकर निर्माण कार्य पूरा होने की निश्चित समयसीमा बताने की मांग करेंगे।
पुनीत टंडन ने चिंता जताई कि लगातार ट्रैफिक का दबाव झेल रही अपर मॉल रोड में पहले ही दरारें पड़ चुकी हैं और सड़क झील की ओर झुकाव भी दिखा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में अपर मॉल रोड भी क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो क्या उत्तराखंड सरकार के पास प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मुआवजा देने की कोई योजना है? या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?