नैनीताल:फांसी गधेरे में सीवर का फिर उफना सैलाब!सिस्टम बोला समस्या हल कर दी,सीवर बोला ऐसे कैसे?पिक्चर अभी बाकी है अधिकारी जी,,अभी तो और बहूंगा!
नैनीताल के तल्लीताल फांसी गधेरे क्षेत्र में सीवर ओवरफ्लो का मामला अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। स्थानीय व्यापार मंडल के संस्थापक अध्यक्ष पुनीत टंडन द्वारा मामला उठाए जाने और उनकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुमाऊं कमिश्नर ने संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन जिस समस्या के समाधान का दावा किया गया, वह अब पहले से अधिक विकराल रूप ले चुकी है।

जी हां! विभागीय हस्तक्षेप के बाद भी सीवर ओवरफ्लो नहीं रुका, बल्कि आज सुबह स्थिति और अधिक खराब हो गई। सड़क पर बड़ी मात्रा में गंदा और मलमूत्र युक्त पानी फैल गया तथा यह गंदगी सीधे नैनीझील की ओर बहती दिखाई दी। जिस प्रकार सीवर का पानी सड़क और नालियों के माध्यम से झील तक पहुंच रहा है, वह न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य बल्कि नैनीताल की सबसे बड़ी प्राकृतिक धरोहर नैनीझील के लिए भी गंभीर खतरा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला सार्वजनिक रूप से उठ चुका था, खबर और वीडियो वायरल हो चुकी थी और पुनीत टंडन के मुताबिक कुमाऊं कमिश्नर स्वयं संज्ञान ले चुके थे, तब भी संबंधित विभाग स्थायी समाधान क्यों नहीं कर पाए? स्थानीय लोगों का आरोप है कि समस्या के मूल कारण को दूर करने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई कर खानापूर्ति की गई।
विडंबना यह भी है कि यह पूरा मामला उस नैनीताल में सामने आ रहा है, जहां उत्तराखंड उच्च न्यायालय स्थित है। पूर्व में उच्च न्यायालय पर्यावरण, स्वच्छता, झील संरक्षण और जनहित से जुड़े कई मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दे चुका है। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या नैनीझील में पहुंचती सीवर की गंदगी और प्रशासनिक लापरवाही के इस मामले पर भी न्यायालय का ध्यान जाएगा।
व्यापार मंडल अध्यक्ष पुनीत टंडन ने कहा कि संबंधित विभाग द्वारा प्रभावी और स्थायी समाधान नहीं किया गया इसीलिए अब मामले को न्यायालय के समक्ष ले जाने सहित अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है,इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता से भी बात की जा रही है।
पर्यटन नगरी नैनीताल की पहचान उसकी स्वच्छता, प्राकृतिक सुंदरता और नैनीझील से है। ऐसे में झील में पहुंचती सीवर की गंदगी और बार-बार उजागर हो रही व्यवस्थागत खामियां प्रशासनिक दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक कर पाते हैं या फिर मामला न्यायिक हस्तक्षेप तक पहुंचता है।