मिडिल ईस्ट तनाव का असरः एलपीजी गैस के लिए मचा हाहाकार! गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी-लंबी लाईनें, दुनियाभर में बढ़ी टेंशन
नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस युद्ध का असर अब दुनियाभर में देखने को मिल रहा है। भारत समेत कई देशों में एलपीजी गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। बता दें कि पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव है, तेल सप्लाई कई जगह बाधित है और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। एक तरफ चुनौतियां बढ़ रही हैं तो वहीं इजरायली प्रधानमंत्री ऐलान कर चुके हैं कि अब ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकना ही एक मात्र लक्ष्य है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने ईरान के साथ युद्ध में अमेरिकी सेना की उपलब्धियों का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान अब तक ईरान में 5,000 से अधिक लक्ष्यों पर सटीक हमला किया गया। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अब ईरान की तरफ से हो रहे ड्रोन हमले काफी कम हो चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि जंग जल्द ही खत्म हो जाएगी। एक दूसरे बयान में उन्होंने यह भी कहा है कि अभी तक अमेरिका ने युद्ध से उतना हासिल नहीं किया जो उम्मीद थी।
इधर इस युद्ध का असर अब भारत के किचन और उन होटलों और रेस्टोरेंट में भी महसूस किया जा रहा है, जो कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। ईरान जंग और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से एलपीजी कुकिंग गैस की कमी हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया भर में एनर्जी का एक बड़ा ज़रिया है। पिछले कुछ दिनों में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनों के वीडियो सामने आए हैं। लेकिन बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ के रेस्टोरेंट और होटलों में यह संकट और भी ज़्यादा महसूस किया जा रहा है। ईरान जंग दूसरे हफ़्ते में पहुंच गई है, तो कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में रुकावट का असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर पड़ने लगा है।
उत्तराखण्ड की बात करें तो यहां भी गैस सिलेंडर के लिए लोग जद्दोजहद करते दिख रहे हैं। सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की खासी भीड़ देखने को मिल रही है। ऊधम सिंह नगर जिला मुख्यालय रुद्रपुर में भी गैस सिलेंडर के लिए लोग लाइनों में लगे दिख रहे हैं। इस दौरान गैस सिलेंडर के लिए लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। हांलाकि एकाएक भीड़ के चलते लाईन लग रही है, लेकिन गैस सिलेंडर उपलब्ध हो रहे हैं। फिलहाल जिस प्रकार मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ रहे हैं, उससे हालात आगे और भी खराब हो सकते हैं।