बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार: सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मिले 446 विशेषज्ञ डॉक्टर, अब जिलों में ही मिलेगा वर्ल्ड क्लास इलाज

Major improvement in Bihar's healthcare system: Government medical colleges receive 446 specialist doctors; world-class treatment will now be available within the districts.

पटना। बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में 446 सीनियर रेजिडेंट एवं ट्यूटर चिकित्सकों की बंपर नियुक्ति और पदस्थापन का अंतिम आदेश जारी कर दिया है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद की मेधावी अनुशंसा के आधार पर इन चिकित्सकों की बहाली 'बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा नियमावली' के तहत तीन वर्ष की टेन्योर अवधि के लिए की गई है। सरकार के इस बड़े फैसले से अब सूबे के सुदूर जिलों में रहने वाले गरीब मरीजों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श और विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, नवनियुक्त डॉक्टरों की तैनाती राज्य के उन प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में की गई है जहां डॉक्टरों की भारी कमी थी। इनमें पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मुजफ्फरपुर, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भागलपुर, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज गया और भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी शामिल हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए पूर्णिया, बेतिया, छपरा, श्रीराम जानकी मेडिकल कॉलेज समस्तीपुर और जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज मधेपुरा में भी इन विशेषज्ञ डॉक्टरों को तुरंत पदस्थापित कर दिया गया है। बहाली पाने वाले इन 446 डॉक्टरों में चिकित्सा जगत की सबसे महत्वपूर्ण और क्रिटिकल विशेषज्ञताओं के विंग शामिल हैं। इनमें मुख्य रूप से एनेस्थीसियोलॉजी,प्रसूति एवं स्त्री रोग,नेत्र रोग और अस्थि रोग,बायोकेमिस्ट्री, डेंटिस्ट्री और पीएमआर,इन विभागों में डॉक्टरों की तैनाती से न केवल मरीजों को समय पर आपातकालीन और ओपीडी उपचार मिलेगा, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं के शिक्षण और रिसर्च की गुणवत्ता में भी भारी सुधार आएगा। विभाग ने इस बार की पदस्थापन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी नवनियुक्त चिकित्सकों से पहले ऑनलाइन माध्यम से उनकी पसंद और प्राथमिकताओं (चॉइस फिलिंग) के विकल्प मांगे गए थे। इसके बाद प्रशासनिक आवश्यकता, जनहित और उपलब्ध सीटों के आधार पर मेरिट के अनुसार पोस्टिंग की गई। इस पूरी प्रक्रिया में मानवीय संवेदनाओं का ख्याल रखते हुए दिव्यांग चिकित्सकों को प्राथमिकता के आधार पर उनके निकटवर्ती या गृह-क्षेत्रों में ही तैनात करने का प्रयास किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस बड़ी बहाली से अब मरीजों को इलाज के लिए पटना या दिल्ली जैसे बड़े शहरों और महंगे निजी (प्राइवेट) अस्पतालों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। सरकार का यह प्रयास बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे अब हर वर्ग को सुलभ और मुफ्त विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।