लखनऊ अग्निकांड: बिना एनओसी चल रहा था 'मौत का कॉम्प्लेक्स! 15 जिंदगियां खा गई सरकारी लापरवाही,एसआईटी गठित,4 अफसर सस्पेंड,4 गिरफ्तार

Lucknow Fire Tragedy: 'Death Complex' operating without NOC! Government negligence claims 15 lives; SIT constituted, 4 officials suspended, 4 arrested.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आलीशान अलीगंज इलाका सोमवार को चीखों, धुएं और अपनों को खोने के मातम में डूब गया। अलीगंज के एक तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग ने न सिर्फ 15 मासूम छात्रों और युवाओं की जान ले ली, बल्कि दिल्ली के कुख्यात मालवीय नगर हादसे के जख्मों और वहां हुई सरकारी लापरवाही की यादों को भी ताजा कर दिया है।

शुरुआती जांच में साफ हो गया है कि इस इमारत में सुरक्षा नियमों की धज्जियां बिल्कुल उसी तरह उड़ाई गई थीं, जैसे दिल्ली के हादसे में देखी गई थीं। हादसे के बाद अब जिम्मेदार अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए वही पुरानी बहानेबाजी कर रहे हैं। इस बीच, इमारत के को-ऑनर (सह-मालिक) सुरेंद्र शुक्ल का विवादित और दागदार रिकॉर्ड भी सामने आ चुका है। सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुष्का, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज भान, भानू प्रताप, जयनिज चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमाल्या...यह सिर्फ चंद नाम नहीं हैं, बल्कि ये वो 15 जीती-जाती जिंदगियां थीं, जिनके अपने-अपने सुनहरे सपने थे। इनमें से कोई अपने करियर की शुरुआत कर रहा था, कोई अपने पूरे परिवार की इकलौती उम्मीद था, तो कोई बुढ़ापे में माता-पिता का सहारा बनने के लिए दिन-रात कोचिंग में पसीना बहा रहा था। लेकिन प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लालच की वजह से चंद मिनटों में इन सभी के सपने, उम्मीदें और खुद उनकी सांसें हमेशा के लिए खाक हो गईं। फॉरेंसिक टीम और प्रशासनिक जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले और डराने वाले हैं। अलीगंज योजना के सेक्टर स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी (कुल क्षेत्रफल 1992 वर्गफुट) के इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अंदर आने और बाहर जाने के लिए सिर्फ एक ही बेहद संकरा रास्ता था। पहली, दूसरी और तीसरी मंजिल पर जाने के लिए भी वही संकरी सीढ़ियां थीं।

हैरानी की बात यह है कि नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर इसी इकलौते रास्ते के ठीक ऊपर 7 इलेक्ट्रिक पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन और मेन इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल लगा दिए गए थे। जैसे ही शॉर्ट सर्किट हुआ, इस कंट्रोल पैनल ने आग पकड़ ली। पूरी बिल्डिंग में कोई 'इमरजेंसी एग्जिट' (आपातकालीन द्वार) नहीं था। नतीजतन, पूरी सीढ़ी और इकलौता रास्ता आग और जहरीले धुएं के गुबार से घिर गया। दूसरी और तीसरी मंजिल पर पढ़ रहे और काम कर रहे लड़के-लड़कियों को बाहर निकलने का कोई मौका ही नहीं मिला और वे अंदर ही फंस गए। पुलिस और लखनऊ विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया है कि इस इमारत का नक्शा 20 अगस्त 2014 को 'आवासीय' रूप में पास कराया गया था, लेकिन इस पर अवैध रूप से तीन मंजिला 'कमर्शियल कॉम्प्लेक्स' खड़ा कर दिया गया। साल 2016 में एलडीए ने इस अवैध निर्माण के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था और 10 मई 2016 को इसे ध्वस्त  करने का आदेश भी जारी हुआ था। लेकिन, रसूखदार मालिकों ने कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर जुलाई में इस आदेश को निरस्त करवा दिया और इसके बाद सालों तक बिना फायर एनओसी के मौत की यह दुकान धड़ल्ले से चलती रही, और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद नाराज हो गए। उन्होंने सोमवार को एक आपातकालीन हाई लेवल मीटिंग बुलाई और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर दो सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। एसआईटी की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा रही है। टीम का मुख्य फोकस आग के कारणों, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय करने पर है।

एलडीए, बिजली विभाग और फायर ब्रिगेड के कुल चार अधिकारियों को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कुल 6 एफआईआर दर्ज की हैं और बिल्डिंग के मालिक समेत 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। एलडीए ने अब इस पूरी विवादित और असुरक्षित इमारत को पूरी तरह से जमींदोज करने का नोटिस भी जारी कर दिया है। लखनऊ के इस भयावह हादसे के बाद पूरे उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। कानपुर विकास प्राधिकरण ने सोमवार को शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब 'काकादेव' में एक साथ धावा बोलकर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी। केडीए की टीमों ने विभिन्न जोनों में एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान जिन संस्थानों में भवन नियमों और सुरक्षा मानकों (फायर सेफ्टी) का खुला उल्लंघन पाया गया, उन्हें तुरंत खाली कराकर सील कर दिया गया। पहले ही दिन 'फिजिक्स वाला', 'वर्कस्पेस', 'महेंद्राज' और 'केमिस्ट्री वाले संजीव राठौर' जैसे 22 नामचीन और चर्चित कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया गया है। केडीए अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान रुकने वाला नहीं है, मानकों से समझौता करने वाले हर संस्थान पर ऐसी ही कार्रवाई की जाएगी। अलीगंज का यह अग्निकांड कोई पहला हादसा नहीं है। हर बार मासूमों की जान जाती है, जांच बैठती है, कुछ सस्पेंशन होते हैं और फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आता है। सवाल यह है कि जब 2016 में इस बिल्डिंग के अवैध होने की बात सामने आ चुकी थी, तो बिना फायर सेफ्टी के इसमें कोचिंग और कमर्शियल गतिविधियां कैसे चल रही थीं? क्या 15 परिवारों के चिराग बुझने का इंतजार किया जा रहा था? अब देखना यह है कि नवगठित एसआईटी की रिपोर्ट के बाद क्या भ्रष्ट तंत्र की जड़ें हिलेंगी या फिर कुछ समय बाद सब कुछ भुला दिया जाएगा।