इनसाइड स्टोरीः रुद्रपुर गैंगरेप केस! ‘सिंघम स्टाइल’ में मैसेज देना पड़ सकता था भारी! रुद्रपुर में पुलिस की अपनी ही पटकथा ‘गले की फांस’ बनते-बनते बची
रुद्रपुर। बीती 25 जुलाई को रुद्रपुर में एक युवती के साथ हुए दरिंदगी भरे सामूहिक दुष्कर्म ने पूरे शहर की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद न केवल आम जनता में आक्रोश था, बल्कि पुलिस-प्रशासन पर भी जल्द और कड़ा एक्शन लेने का भारी दबाव था। सूत्रों के मुताबिक, इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले बदमाशों को कड़ा सबक सिखाने और रुद्रपुर के छोटे-बड़े अपराधियों तक कड़ा मैसेज पहुंचाने के लिए पुलिस महकमे के भीतर ही एक विशेष ‘पटकथा’ लिखी गई थी। इरादा साफ था आरोपियों में कानून का डर बिठाना। लेकिन, यह फिल्मी स्टाइल का प्रयोग ऊधमसिंह नगर पुलिस के लिए खुद ही गले की फांस बनते-बनते बचा। मंगलवार को पुलिस अभिरक्षा में गिरफ्तार दो आरोपियों को ‘क्राइम सीन रिक्रिएशन’ कराने ले जाया गया। जिसके बाद तय स्क्रिप्ट के तहत, वहां से लौटते समय पुलिस आरोपियों को कुछ दूर जनता के सामने से पैदल लाना था, ताकि अपराधियों का मनोबल तोड़ा जा सके। यहां तक तो सब कुछ ठीक था। पुलिस के गणित के अनुसार काशीपुर बायपास रोड स्थित श्री गुरु नानक स्कूल के पास अचानक पुलिस का वाहन बीच सड़क पर बंद हो गया। वाहन रुकते ही जैसे ही चालक उसे ठीक करने नीचे उतरा, मौका पाकर दोनों आरोपियों ने भागने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस टीम ने सतर्कता दिखाते हुए उन्हें दौड़कर पकड़ लिया। लेकिन इस के बाद हालात तब बिगड़ गए, जब आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों पर हमला बोल दिया और मौके पर ही आरोपियों को उनके हवाले करने की मांग की। इतना ही नहीं आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों की जमकर पिटाई कर दी। देखते ही देखते काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। घटनास्थल पर पहले से ही रुद्रपुर के सैकड़ों युवाओं और विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं का तांता लगा हुआ था। देखते ही देखते काशीपुर बायपास रोड रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। गुस्साई भीड़ ने आरोपियों को चारों तरफ से घेरकर जूते-चप्पलों, लात-घूंसों और थप्पड़ों से पीटना शुरू कर दिया। उग्र भीड़ ने न केवल आरोपियों को अपने हवाले करने की मांग की, बल्कि उनके चेहरे पर कालिख पोतने का भी भरसक प्रयास किया। गुस्साए लोग ‘ऑन द स्पॉट’ इंसाफ की मांग करते हुए आरोपियों को फांसी दिए जाने के नारे लगाने लगे। मौके पर मौजूद पुलिस बल की संख्या भीड़ के मुकाबले काफी कम थी। स्थिति इस कदर नाजुक हो गई थी कि यदि पुलिस जरा सी भी ढील देती तो भीड़ उग्र हो सकती थी और हालात बिगड़ सकते थे। हालांकि, विपरीत परिस्थितियों में रुद्रपुर कोतवाल प्रकाश सिंह, एसएसआई खुशवंत सिंह, दिनेशपुर थाना प्रभारी पंकज कुमार और बाजार चौकी प्रभारी प्रदीप कोहली ने बेहद साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। पुलिस अधिकारियों ने उग्र भीड़ के बीच ढाल बनकर आरोपियों को बचाया। अतिरिक्त पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के बाद हल्का बल प्रयोग करते हुए भीड़ को खदेड़ा गया और कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों को दोबारा गाड़ी में बैठाकर कोतवाली पहुंचाया गया। इस पूरे ड्रामे और ‘स्क्रिप्ट’ के फ्लॉप होने के बाद जब उच्च अधिकारियों से घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो अधिकांश अधिकारी इस मामले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एसएसपी अजय गणपति के निर्देशन में गठित एसओजी और सर्विलांस टीम ने मुठभेड़ (जिसमें मुख्य आरोपी के पैर में गोली लगी थी) के बाद आरोपियों को दबोचकर बेहतरीन काम किया था, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर सुरक्षा प्रबंधन में हुई इस बड़ी चूक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, पुलिस कानूनी विवेचना और साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन यह घटना शहर में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
वही अब इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की अभिरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी भागने की स्थिति तक कैसे पहुंच गए? वाहन की तकनीकी खराबी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे? भीड़ आरोपियों तक इतनी आसानी से कैसे पहुंच गई? इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने भी आंतरिक स्तर पर मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। यह सच है कि रुद्रपुर गैंगरेप कांड ने लोगों को झकझोर दिया और आरोपियों के प्रति समाज में भारी गुस्सा है। लेकिन कानून के शासन में किसी भी आरोपी को न्यायालय के फैसले से पहले भीड़ के हवाले नहीं किया जा सकता। पुलिस का दायित्व केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया तक सुरक्षित पहुंचाना भी है। रुद्रपुर की इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि जन भावनाओं के उफान के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना कितना कठिन होता है। यदि पुलिस कुछ मिनट भी संयम खो देती या भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो जाती, तो यह मामला केवल गैंगरेप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक बड़े कानून-व्यवस्था संकट में बदल सकता था। फिलहाल, इस घटना में शामिल आरोपी पुलिस अभिरक्षा में हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। वहीं, यह पूरा घटनाक्रम पुलिस के लिए भी एक सबक बन गया है कि संवेदनशील मामलों में जांच जितनी महत्वपूर्ण होती है, उतनी ही महत्वपूर्ण सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और कानून के संतुलित पालन की जिम्मेदारी भी होती है।