भारत के हर्ष सिंह ने रच दिया इतिहास! मैट पर बरसों की तपस्या का मिला स्वर्णिम फल
ग्लास्गो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खेल इतिहास का एक नया अध्याय उस समय लिखा गया, जब 23 वर्षीय जूडोका हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश को जूडो के पुरुष वर्ग का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण दिला दिया। फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी जोशुआ काट्ज़ को 10-0 से हराकर हर्ष ने साबित कर दिया कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास आखिरकार इतिहास रच ही देते हैं।
रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही हर्ष के चेहरे पर जीत की मुस्कान और कंधों पर लहराता तिरंगा भारतीय जूडो के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। यह केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस लंबे इंतजार का अंत भी था, जिसका सपना भारतीय जूडो वर्षों से देख रहा था। करीब 2003 में जन्मे हर्ष सिंह ने बचपन से ही जूडो को अपना लक्ष्य बना लिया था। जब हमउम्र बच्चे खेलकूद में समय बिताते थे, तब हर्ष घंटों मैट पर अभ्यास कर अपनी तकनीक को निखारते थे। घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली, जहां से उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत हुई। हर्ष ने टोक्यो ग्रैंड स्लैम 2025, ताशकंद ग्रैंड स्लैम 2026 और सीनियर एशियन चैंपियनशिप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। शुरुआती दौर में कई मुकाबलों में हार का सामना भी करना पड़ा, लेकिन हर हार उनके लिए सीख बनती गई। लगातार प्रदर्शन के दम पर वह दुनिया के सबसे प्रतिस्पर्धी 60 किलोग्राम वर्ग के शीर्ष-100 खिलाड़ियों में जगह बनाने में सफल रहे। कजाकिस्तान ग्रैंड स्लैम 2026 में सातवां स्थान हासिल कर उन्होंने बड़े मंच पर अपनी दावेदारी पहले ही मजबूत कर दी थी। ग्लास्गो में हर्ष का अभियान शानदार रहा। उन्होंने शुरुआती मुकाबले में मलावी के चिकोंडी काथेवेरा को इप्पोन से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में वानुआतु के एलन मोंथोएल को मात देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस एंटुन नेटो के खिलाफ मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जहां हर्ष ने वाजा-आरी के दम पर जीत दर्ज कर फाइनल का टिकट हासिल किया। स्वर्ण पदक मुकाबले में उनके सामने अनुभवी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोशुआ काट्ज़ थे। रैंकिंग और अनुभव भले ही प्रतिद्वंद्वी के पक्ष में था, लेकिन हर्ष ने धैर्य और शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले के अंतिम चरण में बेहतरीन लो ताई-ओतोशी मूव लगाया। इस निर्णायक दांव ने मुकाबले का रुख बदल दिया और हर्ष ने 10-0 से जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। हर्ष की उपलब्धि ने भारतीय जूडो को एक और ऐतिहासिक खुशी दी। उनसे कुछ घंटे पहले अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। इस तरह पहली बार भारत ने किसी एक कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में दो स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हर्ष सिंह को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत भारतीय जूडो के लिए एक नए युग की शुरुआत है। हर्ष सिंह की कहानी बताती है कि इतिहास प्रतिभा से नहीं, बल्कि वर्षों की निष्ठा, संघर्ष और कभी हार न मानने वाले जज्बे से लिखा जाता है। ग्लास्गो का यह स्वर्ण केवल एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय जूडो के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीद बन गया है।