पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: छात्रा से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को 'दोहरी फांसी' की सजा
चेन्नई। तमिलनाडु के थूथुकुड़ी जिला पॉक्सो कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए कानून व्यवस्था की मिसाल पेश की है। अदालत ने 12वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में दोषी धर्मा मुनिस्वरन को 'दोहरा मृत्युदंड' (दोहरी फांसी) की सजा सुनाई है। इस साल मार्च महीने में विलाथिकुलम इलाके में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। नाबालिगों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट की तर्ज पर बेहद तेजी से की गई।
कानूनी प्रक्रिया को गति देते हुए इस मामले की जांच और अदालती कार्यवाही को करीब तीन महीने के भीतर ही पूरा कर लिया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से बेहद मुस्तैदी दिखाई गई और कोर्ट ने कुल 71 गवाहों के बयान दर्ज किए। वैज्ञानिक और पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध हुआ। कानून के जानकारों का मानना है कि इतनी जल्दी सुनवाई पूरी होना और दोषी को अंजाम तक पहुंचाना न्यायपालिका और तमिलनाडु पुलिस की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिससे आम जनता का कानूनी व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा। इस बड़े फैसले के तुरंत बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सचिवालय में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की स्थिति की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस महानिदेशक, समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और महाधिवक्ता कार्यालय के आला अफसर शामिल हुए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्य में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह के त्वरित फैसले अपराधियों के मन में खौफ पैदा करेंगे। समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े जघन्य अपराधों में बिना किसी देरी के तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस मामलों की जांच को तय समय सीमा के भीतर पूरा करे ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द और सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि ऐसे घिनौने कृत्य करने वालों के लिए कानून में कोई जगह नहीं है।