बागेश्वर में बारिश का कहरः घेटी गांव में मकान ध्वस्त! कपकोट की 14 सड़कें बंद, 30 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा
बागेश्वर। बागेश्वर में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बारिश के चलते जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। गरुड़ तहसील के घेटी गांव में देर रात हुई तेज बारिश के कारण एक आवासीय भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गया। गनीमत रही कि हादसे के दौरान भवन में मौजूद परिवार के सदस्यों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्राम प्रधान ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रभावित परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कराया। इसके साथ ही परिवार को प्राथमिक सहायता के तौर पर खाने-पीने की आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। प्रभावित परिवार ने प्रशासन से जल्द से जल्द मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उन्हें इस मुश्किल समय में राहत मिल सके। जानकारी के अनुसार गरुड़ तहसील क्षेत्र के घेटी गांव निवासी दिनेश कुमार का आवासीय भवन देर रात हुई तेज बारिश की चपेट में आकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। लगातार बारिश के कारण भवन पर दबाव बढ़ता गया और आखिरकार मकान धराशायी हो गया।
कपकोट में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
उधर, जिले की कपकोट तहसील में भी लगातार बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। क्षेत्र में जगह-जगह भूस्खलन और मलबा आने के कारण सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं। कई ग्रामीण मार्गों पर भारी मात्रा में मलबा आने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। जानकारी के अनुसार कपकोट क्षेत्र में करीब 14 प्रमुख सड़कें मलबा आने के कारण बंद हैं। सड़कें बंद होने से करीब 30 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों को आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लोगों के आवागमन पर भी इसका असर पड़ा है। सड़कें बंद होने की सूचना के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने प्रभावित मार्गों को खोलने का काम शुरू कर दिया है। विभिन्न स्थानों पर जेसीबी मशीनों के माध्यम से मलबा हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि प्राथमिकता के आधार पर उन सड़कों को खोला जाए, जिनसे अधिक संख्या में गांव जुड़े हुए हैं। हालांकि लगातार बारिश होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा हटाने के बाद दोबारा भूस्खलन होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में मशीनों और कर्मचारियों को भी सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।