ईरान-इजराइल तनाव पर हाई अलर्ट: पीएम मोदी ने बुलाई सीसीएस की आपात बैठक
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की अहम बैठक बुलाई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री अपने दो दिवसीय दौरे से आज रात करीब 9:30 बजे दिल्ली पहुंचेंगे और उसके तुरंत बाद उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद उत्पन्न क्षेत्रीय संकट, सुरक्षा हालात और भारत के रणनीतिक हितों पर व्यापक चर्चा होगी। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे। पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात को देखते हुए बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक का सबसे अहम एजेंडा पश्चिम एशिया, खासकर यूएई और आसपास के देशों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा होगा। सरकार वहां फंसे भारतीयों की स्थिति की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर संभावित निकासी योजना पर भी विचार किया जाएगा। भारतीय दूतावासों द्वारा जारी एडवाइजरी और जमीनी हालात की जानकारी भी बैठक में साझा की जाएगी। बढ़ते सैन्य तनाव के कारण हवाई सेवाओं पर पड़े प्रभाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा होने की संभावना है। ईरान-इजराइल टकराव को लेकर भारत ने पहले ही संतुलित रुख अपनाते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि तनाव को और बढ़ाने से बचना चाहिए तथा नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत ने संवाद और कूटनीति को ही संकट का समाधान बताया है और सभी देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची से फोन पर बातचीत कर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया। साथ ही इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन साआर से भी संपर्क कर दोनों पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील दोहराई गई। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में इजराइल दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने इजराइली संसद में संबोधन दिया था और भारत-इजराइल संबंधों को मजबूत साझेदारी बताया था। हालांकि मौजूदा हालात में भारत संतुलित कूटनीतिक नीति अपनाते हुए अपने सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक हितों पर पैनी नजर बनाए हुए है। पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आयात, व्यापार और प्रवासी भारतीयों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। लंबे संघर्ष की स्थिति में तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि सीसीएस की यह बैठक रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है और इसके निर्णयों पर देश-विदेश की निगाहें टिकी हैं।