मां हाट कालिका के दरबार में भावुक हुए राज्यपाल: सेना के दिनों को याद कर कहा- कुमाऊं रेजीमेंट और सैनिकों पर हमेशा रही मां की कृपा

Governor gets emotional at the shrine of Maa Hat Kalika; recalling his Army days, he says the Mother's blessings have always been upon the Kumaon Regiment and the soldiers.

बेरीनाग। पिथौरागढ़ जिले के दो दिवसीय भ्रमण पर पहुंचे उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) अपने दौरे के दूसरे दिन मुनस्यारी से सीधे प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां हाट कालिका मंदिर, गंगोलीहाट पहुंचे। मंदिर में कदम रखते ही राज्यपाल अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारियों की मौजूदगी में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और समूचे उत्तराखंड तथा जनपदवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद स्थानीय जनता, श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के पदाधिकारियों से संवाद कर क्षेत्र के विकास और पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

पूजा-अर्चना के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मां हाट कालिका के दर्शन का अवसर मिलना उनके लिए परम सौभाग्य और असीम आत्मिक शांति का विषय है। भारतीय सेना में बिताए अपने दिनों को याद करते हुए वे बेहद भावुक हो उठे। उन्होंने साझा किया कि लगभग चार दशकों (40 वर्ष) तक भारतीय सेना में सेवा के दौरान उनका कुमाऊं रेजीमेंट से बेहद गहरा और अटूट जुड़ाव रहा है। उन्होंने गर्व से कहा कि मां कालिका की असीम कृपा और आशीर्वाद से ही भारतीय सैनिकों ने हमेशा राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए अद्वितीय और ऐतिहासिक योगदान दिया है। आज मां के दरबार में साक्षात उपस्थित होकर उन्हें एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और अदम्य साहस की अनुभूति हो रही है। राज्यपाल ने मां हाट कालिका मंदिर समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने परिसर की व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का सुव्यवस्थित विकास न केवल हमारी आस्था को मजबूत करता है, बल्कि यह पर्यटन संवर्धन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नई और आत्मनिर्भर दिशा प्रदान करता है। उन्होंने प्रत्येक वर्ग से अपील की कि उत्तराखंड की इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने होंगे। इससे पहले, राज्यपाल ने मुनस्यारी स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की 14वीं वाहिनी की अग्रिम चौकी का भी दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात देश के हिमवीरों (अधिकारियों एवं जवानों) के साथ सीधा संवाद किया। अत्यंत विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमांत सीमाओं की सुरक्षा करने, आपदा प्रबंधन के समय त्वरित रेस्क्यू करने और स्थानीय नागरिकों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए उन्होंने आईटीबीपी के योगदान की सराहना की। राज्यपाल ने जवानों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि देश को अपने इन वीर जवानों पर नाज है, जिनकी मुस्तैदी के कारण पूरा देश चैन की नींद सोता है।