Good Morning India: भारत की तरह अमेरिका में भी एसआईआर! ट्रंप ने शुरू किया वोटर लिस्ट साफ करने का अभियान,पहाड़ी राज्यों में बारिश और भूस्खलन से तबाही,आज उत्तराखंड पहुंचेंगे उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन,1 सितंबर से 'खेल महाकुंभ' का आगाज,लिंक में पढ़ें प्रमुख खबरें 

Good Morning India: Like India, the US too is cleaning up voter rolls! Trump launches a campaign to purge voter lists; rain and landslides wreak havoc in hill states; Vice President Radhakrishnan to

नमस्कार दोस्तों, आवाज इंडिया अपना खास कॉलम 'गुड मॉर्निंग इंडिया' लेकर एकबार फिर आपके समक्ष हाजिर है। आईए शुरुआत करते हैं उन सुर्खियों के साथ,जो आज पूरे दिन चर्चा में रहने वाली हैं।

अमेरिका में भी 'एसआईआर! ट्रंप ने छेड़ा वोटर लिस्ट की शुद्धता का अभियान,मिले 24 हजार गैर-नागरिक मतदाता 

33 KM के 'तेल गलियारे' पर ट्रंप का दावा: होर्मुज बना अमेरिका का नया इलाका, खाड़ी में महासंग्राम

ईरान के निशाने पर यूएई? दागी गईं दो बैलिस्टिक मिसाइलें, रक्षा मंत्रालय ने जारी किया हाई अलर्ट

बच्चों पर इंस्टाग्राम के बुरे असर से वाकिफ था मेटा? 29 अमेरिकी राज्यों ने लगाया गंभीर आरोप

पहाड़ी राज्यों में बारिश और भूस्खलन से तबाही, 4 की मौत, उत्तराखंड में नदियाँ उफान पर और राजस्थान में अलर्ट

झारखंड में बड़ा प्रशासनिक फैसला, 44 सरकारी परीक्षाएं रद्द, जेपीएससी-जेएसएससी में भारी सुधार की तैयारी

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद बड़ी कार्रवाई,व्यवस्था से हटाए गए अनिल मिश्रा के दो करीबी 

महिला कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला,तीसरे बच्चे के जन्म पर मिलेगी 1 साल की पेड मैटरनिटी लीव

गॉल टेस्ट पर भारत की मजबूत पकड़: जीत के लिए चाहिए 6 विकेट, श्रीलंका के सामने 372 रनों का पहाड़

आत्मनिर्भर भारत' की बड़ी छलांग: रक्षा मंत्रालय ने जारी की 405 सैन्य सामानों की छठी स्वदेशीकरण सूची

तेजी से गर्म हो रहा पश्चिमी हिमालय: 120 सालों के शोध में खुलासा, सर्दियों में बर्फ पिघलने का बढ़ा खतरा

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष भयावह: 25 सालों में 954 लोगों की मौत, तेंदुए के हमलों में सबसे ज्यादा जानें गईं

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का दो दिवसीय उत्तराखंड दौरा: देहरादून और मसूरी में चाक-चौबंद सुरक्षा

सिटिंग-गेटिंग' फॉर्मूले से बीजेपी का बड़ा दांव: उत्तराखंड में हैट्रिक लगाने के लिए सांसदों और विधायकों को मिला नया टास्क

उत्तराखंड में मानसून का कहर: पहाड़ों पर लैंडस्लाइड से मार्ग ठप, देहरादून और बागेश्वर में भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट'

उत्तराखंड में 1 सितंबर से 'खेल महाकुंभ' का आगाज: न्याय पंचायत से राज्य स्तर तक दिखेगा खिलाड़ियों का दम

हेडलाइंस के बाद आइए अब रुख करते हैं आज की बड़ी खबरों की तरफ-वॉशिंगटन। अमेरिका में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के मिलान में 24 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनके बारे में गैर-नागरिक होने का दावा किया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक अभी 3.2 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच बाकी है और यह संख्या बढ़ सकती है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर दावा किया कि शुरुआती 12.8 करोड़ मतदाता रिकॉर्ड की जांच में कथित तौर पर 24 हजार से अधिक गैर-नागरिकों के वोट डालने का पता चला है। व्हाइट हाउस के आंकड़ों में मेक्सिको में जन्मे लोगों की संख्या सबसे अधिक करीब 3,800 बताई गई है। इसके बाद कनाडा, फिलीपींस, जमैका, जर्मनी और ब्रिटेन सहित अन्य देशों में जन्मे लोगों के आंकड़े दिए गए हैं। इसी मुद्दे को आधार बनाकर ट्रंप ने ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की मांग दोहराई है। प्रस्तावित कानून में संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है। राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर-नागरिकों के नाम हटाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे। खास बात यह है कि ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था की भी सराहना की है। उन्होंने भारत में फोटो पहचान पत्र की व्यापक व्यवस्था को अमेरिका के लिए उदाहरण बताया। 

नई दिल्ली। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। करीब 167 किलोमीटर लंबे इस समुद्री मार्ग की सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 33-39 किलोमीटर है। लेकिन इसी संकरे रास्ते से दुनिया के समुद्री तेल कारोबार का करीब 20-25 फीसदी हिस्सा गुजरता है। यही वजह है कि होर्मुज में जरा सी भी रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकती है। होर्मुज के उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा यूएई स्थित हैं। खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई के लिए यह दुनिया के बाजारों तक पहुंचने वाला सबसे अहम समुद्री मार्ग है। यहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की आवाजाही होती है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने इसे अमेरिकी हितों से जोड़ते हुए यहां अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी के जरिए दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। वहीं ईरान ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए होर्मुज पर अपना अधिकार जताया है। भारत के लिए क्यों अहम? भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल तथा एलएनजी की आपूर्ति के लिए होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण है। रास्ता बाधित होने पर तेल-गैस महंगी हो सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। 

अबू धाबी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर से हड़कंप मच गया है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की दिशा से यूएई की ओर आती दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। मंत्रालय के मुताबिक, दोनों मिसाइलों में से एक यूएई के क्षेत्रीय जल से बाहर जा गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश के क्षेत्रीय जल में गिरी। हालांकि, बयान में मिसाइल हमले से किसी बड़े नुकसान या हताहत की तत्काल जानकारी नहीं दी गई है। घटना के बाद यूएई ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए हाई अलर्ट जारी रखा है। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि देश किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूएई की संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश का मजबूती से जवाब दिया जाएगा। मिसाइलों की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव का असर खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। यूएई ने कहा है कि वह राष्ट्रीय हितों और अपनी क्षमताओं की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने को तैयार है। 

वाशिंगटन। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के किशोरों पर कथित नकारात्मक असर को लेकर मेटा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अमेरिका के 29 राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने आरोप लगाया है कि कंपनी को अपने अंदरूनी शोध से पता था कि इंस्टाग्राम किशोरों के लिए लत लगाने वाला हो सकता है, फिर भी उसने इस जानकारी को छिपाया और प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स में बदलाव नहीं किया। कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित संघीय अदालत में मामले की सुनवाई शुरू हो गई है, जो छह से आठ सप्ताह तक चलने की संभावना है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के ऐसे फीचर्स जानबूझकर तैयार किए, जो युवाओं को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जोड़े रखते थे, जबकि कंपनी को इनके संभावित मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी थी। अभियोजकों के मुताबिक, मेटा की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और गवाहियों में किशोरों के प्लेटफॉर्म के आदी होने से जुड़े संकेत मिले थे। मुकदमे में यह भी आरोप लगाया गया है कि मेटा ने माता-पिता की अनुमति के बिना 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा एकत्र किया, जो संघीय और राज्य कानूनों का उल्लंघन है। 29 राज्यों का कहना है कि कंपनी ने कथित नुकसानदेह फीचर्स को हटाने के बजाय आर्थिक मुनाफे को प्राथमिकता दी। दोषी पाए जाने पर मेटा पर 200 अरब डॉलर तक के हर्जाने का दावा किया जा सकता है। राज्यों ने बच्चों के लिए प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने के लिए उत्पादों में बदलाव की मांग भी की है। 

शिमला। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तराखंड के कोटद्वार में पहाड़ों से आए मलबे में मकान ढहने से एक दो वर्षीय मासूम और वृद्धा की जान चली गई। वहीं, केदारनाथ पैदल मार्ग पर भूस्खलन से दिल्ली की एक श्रद्धालु की मौत हो गई। इसके अलावा, चमोली की पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना टनल हादसे में बचाव अभियान के दौरान दो और शव बरामद होने से मृतकों की संख्या 10 हो गई है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में तीन स्थानों पर बादल फटने से सड़कें बह गईं, जिससे नीलकंठ यात्रा पर निकले कई श्रद्धालु और वाहन फँस गए। सिरमौर में चूना पत्थर की खान ढहने से तीन मजदूर दब गए। उधर, देहरादून में स्वारना नदी के उफान में फँसे छह छात्रों को एसडीआरएफ की टीम ने सुरक्षित निकाला। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा को पार कर चुका है। मौसम विभाग ने उत्तराखंड के देहरादून और बागेश्वर में भारी से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर समेत 10 जिलों में अगले तीन दिनों के लिए तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं जम्मू संभाग के लिए ऑरेंज और कश्मीर के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।

रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने देर रात आठ अधिसूचनाएं जारी कर 44 परीक्षाओं को रद्द कर दिया। इनमें 2014 से झारखंड लोक सेवा आयोग और आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल के जरिए आयोजित कई परीक्षाएं शामिल हैं। रद्द की गई परीक्षाओं में ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पदों की भर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी पॉलीटेक्निक में व्याख्याता, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी और सहायक वन संरक्षक समेत कई प्रशासनिक व तकनीकी पदों की परीक्षाएं भी निरस्त की गई हैं। सरकार ने टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उसके प्रकाशित सभी परिणामों को भी रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा भी शामिल है, जिसे रद्द करना आंदोलनरत छात्रों की प्रमुख मांगों में था। अधिसूचनाओं में भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से त्वरित न्यायालय गठित करने का अनुरोध करने की बात कही गई है। साथ ही जेपीएससी-जेएसएससी  में आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ बनाने का प्रावधान किया गया है। भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। सरकार के इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी, वहीं अब नई व्यवस्था और परीक्षाओं के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बदलाव का सिलसिला जारी है। ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के करीबी माने जाने वाले दो कर्मचारियों को राम मंदिर की व्यवस्था से हटा दिया गया है। दोनों को अब बाग बिजैसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेजा गया है और मंदिर परिसर में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। हटाए गए कर्मचारियों में केडी तिवारी उर्फ ‘बड़े बाबू’ और बजरंग पाठक शामिल हैं। केडी तिवारी रामलला के आभूषणों तथा श्रद्धालुओं की ओर से समर्पित मूल्यवान वस्तुओं के हिसाब-किताब से जुड़ी जिम्मेदारी संभालते थे। वहीं बजरंग पाठक वीआईपी दर्शनार्थियों को प्रसाद, अंगवस्त्र और अन्य भेंट उपलब्ध कराने की व्यवस्था देखते थे। जानकारी के मुताबिक, दोनों कर्मचारियों को अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने पहले शिकायत के आधार पर नोटिस दिया था। इसके बाद प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें राम मंदिर की जिम्मेदारियों से हटाकर तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया गया। दोनों मंगलवार से मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कार्रवाई के पीछे मंदिर में तैनात एक महिला क्षेत्राधिकारी की शिकायत भी अहम रही। उनके कुछ अतिथियों के दर्शन के दौरान प्रसाद आदि की व्यवस्था को लेकर बजरंग पाठक से विवाद हुआ था। शिकायत के बाद मामले में कार्रवाई की गई। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद ट्रस्ट की ओर से व्यवस्थाओं की समीक्षा और जिम्मेदारियों में बदलाव लगातार किए जा रहे हैं। ऐसे में दो और कर्मचारियों को हटाया जाना प्रशासनिक सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने घोषणा की है कि तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को अब 12 सप्ताह के बजाय 365 दिन यानी एक साल की मातृत्व छुट्टी मिलेगी। सरकार के इस फैसले को महिला कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है। मानव संसाधन प्रबंधन मंत्री डी. सरतकुमार ने मंगलवार को विधानसभा में विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दे रही है। इसी उद्देश्य से तीसरे बच्चे के लिए मौजूदा 12 सप्ताह की मातृत्व छुट्टी को बढ़ाकर एक साल करने का निर्णय लिया गया है। राज्य में अभी नियमित महिला कर्मचारियों को, निर्धारित पात्रता शर्तों के तहत, दो से कम जीवित बच्चों की स्थिति में 365 दिन तक मातृत्व अवकाश मिलता है। वहीं दो या उससे अधिक जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारियों के लिए अधिकतम 12 सप्ताह की छुट्टी का प्रावधान है। नए फैसले के बाद तीसरे बच्चे के मामले में भी एक साल की छुट्टी का रास्ता साफ होगा। तमिलनाडु में मातृत्व अवकाश की अवधि पिछले वर्षों में कई बार बढ़ाई गई है। 2011 में इसे 90 दिन से बढ़ाकर छह महीने किया गया था। 2016 में अवधि नौ महीने और जुलाई 2021 में बढ़ाकर 365 दिन की गई थी। मंत्री की घोषणा के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए प्रावधान को लागू करने के लिए विस्तृत सरकारी आदेश जल्द जारी किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब विधायक आर. पल्लवी के विधानसभा सत्र में अपने नवजात बच्चे को साथ लाने को लेकर भी चर्चा और विवाद चल रहा है।

गॉल। भारत ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच पर शिकंजा कस दिया है। चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 84 रन बना लिए हैं। उसे जीत के लिए अब 288 रन और चाहिए, जबकि भारतीय टीम सीरीज में बढ़त बनाने से सिर्फ छह विकेट दूर है। स्टंप्स के समय धनंजय डि सिल्वा 31 और सोनल दिनुषा 25 रन बनाकर क्रीज पर डटे थे। भारत ने श्रीलंका के सामने 372 रन का लक्ष्य रखा था। श्रीलंका का शीर्ष क्रम एक बार फिर भारतीय गेंदबाजों के सामने लड़खड़ा गया। मोहम्मद सिराज ने निशान मदुश्का को छह रन पर आउट किया। इसके बाद मानव सुथार ने पसिंदु सूर्याबांदारा को खाता खोले बिना पवेलियन भेज दिया। प्रसिद्ध कृष्णा ने कामिंदु मेंडिस और लाहिरु उदारा को आउट कर श्रीलंका की मुश्किल बढ़ा दी। एक समय श्रीलंका का स्कोर चार विकेट पर 47 रन था। हालांकि धनंजय और सोनल ने पांचवें विकेट के लिए 37 रन की नाबाद साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश की है। अब अंतिम दिन दोनों पर बड़ी जिम्मेदारी होगी। इससे पहले भारत ने दूसरी पारी में 193 रन बनाए। ऋषभ पंत ने 66 और देवदत्त पडिक्कल ने 44 रन की उपयोगी पारियां खेलीं। पंत ने महज 53 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्के लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जडेजा के साथ 54 रन जोड़े। गॉल में टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज 344 रन है, जो पाकिस्तान ने 2022 में हासिल किया था। ऐसे में श्रीलंका के सामने पांचवें दिन इतिहास रचने की बड़ी चुनौती है।

नई दिल्ली। भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को 405 सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं की छठी सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी की। इन वस्तुओं का वर्तमान में आयात किया जाता है और इनका अनुमानित व्यापार मूल्य करीब 3,070 करोड़ रुपये है। सूची में लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चे माल समेत कई अहम रक्षा उपकरण शामिल हैं। इनमें भारतीय तटरक्षक बल की 16 और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) की 389 वस्तुएं हैं। छठी सूची में भारतीय रक्षा बलों के कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म और प्रणालियां शामिल हैं। इनमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, सुखोई-30 एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन जैसे विमानन प्लेटफॉर्म के उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा टी-72, टी-90 और बीएमपी-II जैसे बख्तरबंद प्लेटफॉर्म, युद्धपोत, विभिन्न मिसाइल प्रणालियां, रडार, सोनार और अग्नि नियंत्रण प्रणाली भी सूची में शामिल हैं। मंत्रालय ने प्रत्येक वस्तु के स्वदेशीकरण के लिए एक अनुमानित समय-सीमा तय की है। तय समय के बाद इन वस्तुओं की खरीद भारतीय रक्षा उद्योग से की जाएगी। इससे घरेलू कंपनियों को नए अवसर मिलने, अनुसंधान एवं नवाचार बढ़ने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 तक सृजन पोर्टल के जरिए 33 हजार से अधिक रक्षा उत्पादों को स्वदेशीकरण के लिए पेश किया गया है। इनमें पहली पांच सूचियों के 5,012 आइटम भी शामिल हैं। अब तक 15,700 से अधिक रक्षा उत्पादों का सफल स्वदेशीकरण हो चुका है, जिससे पांच वर्षों में करीब 9,000 करोड़ रुपये के आयात में कमी आई है।

आइए अब नज़र डालते हैं उत्तराखंड की ख़बरों पर-देहरादून। जलवायु परिवर्तन का असर हिमालय पर तेजी से गहराता जा रहा है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि पश्चिमी हिमालय में तापमान सबसे तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दशकों में बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ने का खतरा है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन मौजूदा रफ्तार से जारी रहा तो इस सदी के अंत तक पश्चिमी हिमालय में बसंत के दौरान बर्फ पिघलने की गति करीब तीन गुना हो सकती है। जर्नल ऑफ अर्थ सिस्टम साइंस में प्रकाशित अध्ययन के लिए 1901 से 2020 तक के 120 वर्षों के तापमान रिकॉर्ड और आठ वैश्विक जलवायु मॉडलों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने हिमालय को पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में बांटकर तापमान और बर्फ में बदलाव का आकलन किया। अध्ययन के मुताबिक लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश वाले पश्चिमी हिमालय में सर्दियों के तापमान में करीब 1.06 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज हुई। बसंत में यहां तापमान करीब 1.08 डिग्री बढ़ा। खास बात यह है कि दिन के मुकाबले रात का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार पूरे हिमालय में अब तक करीब एक डिग्री सेल्सियस तक गर्मी बढ़ चुकी है, लेकिन इसका असर सभी क्षेत्रों में समान नहीं है। पश्चिमी हिमालय को सबसे अधिक संवेदनशील पाया गया है। यदि उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं हुआ तो 2081-2100 के दौरान शुरुआती 20वीं सदी की तुलना में पश्चिमी हिमालय की सर्दियां 7.18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो सकती हैं। इससे ग्लेशियरों, नदियों और हिमालयी राज्यों की जल सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। हिमालय से निकलने वाली सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष अब गंभीर चिंता का कारण बन गया है। एक अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2000 से 2025 के बीच राज्य में वन्यजीवों के हमलों में करीब 954 लोगों की मौत हुई। इनमें सबसे ज्यादा 548 मौतें तेंदुए के हमलों से हुईं। इसके बाद हाथियों के हमलों में 230, बाघों के हमलों में 106 और भालुओं के हमलों में 70 लोगों की जान गई। मिजोरम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद सती के अध्ययन में सामने आया है कि राज्य में वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में करीब 3,200 भालू, 2,276 तेंदुए, 2,026 हाथी और अनुमानित 560 बाघ हैं। इनमें करीब 260 बाघ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हैं। अध्ययन के अनुसार तेंदुए के हमलों में 25 वर्षों के दौरान 2,127 लोग घायल हुए, जबकि भालुओं के हमलों में 2,013 लोग घायल हुए। हाथियों से 234 और बाघों से 130 लोग घायल हुए। हाल के वर्षों में स्थिति और चिंताजनक रही। 2020 से 2025 के बीच ही वन्यजीव संघर्ष में 438 लोगों की मौत और 2,335 लोग घायल हुए। वर्ष 2024 में सबसे ज्यादा 84 मौतें दर्ज हुईं, जबकि 2022 में 82 लोगों की जान गई। घायलों के मामले में भी 2024 सबसे आगे रहा, जब 512 लोग घायल हुए। जिलेवार आंकड़ों में पौड़ी सबसे बड़ा हॉटस्पॉट रहा, जहां 53 लोगों की मौत हुई। अल्मोड़ा में 47 और टिहरी में 36 मौतें हुईं। नैनीताल और चमोली में 30-30 लोगों की जान गई। अध्ययन के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में भालू और तेंदुए प्रमुख संघर्षकारी वन्यजीव हैं, जबकि मैदानी जिलों में हाथियों का दबदबा है। हाथी गलियारों की कमी और बढ़ता मानवीय दबाव संघर्ष को और गंभीर बना रहे हैं।

देहरादून। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन बुधवार से उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। उनके दौरे को लेकर देहरादून और मसूरी में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। प्रशासन ने दोनों कार्यक्रम स्थलों के आसपास सुरक्षा के साथ ही यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया है। उपराष्ट्रपति 19 अगस्त को देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) पहुंचेंगे। यहां वह 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से संवाद करेंगे। इस दौरान वह प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत कर वन प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विषयों पर विचार साझा कर सकते हैं। इसके बाद 20 अगस्त को उपराष्ट्रपति मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 2024 बैच के आईएएस प्रोफेशनल कोर्स के द्वितीय चरण के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करने के साथ उनके प्रशिक्षण की औपचारिक पूर्णता भी होगी। दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति दोनों अकादमियों में सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उपराष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। कार्यक्रम स्थलों के आसपास अतिरिक्त बल की तैनाती, आवाजाही की निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। देहरादून और मसूरी में वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक तैयारियां की गई हैं। दोनों प्रतिष्ठित अकादमियों में होने वाले कार्यक्रमों को देखते हुए उपराष्ट्रपति का यह दौरा प्रशासनिक और वन सेवा के भावी अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अभी से अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ पार्टी सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय को चुनावी रणनीति का प्रमुख आधार बना रही है। पार्टी ने मौजूदा विधायकों के लिए ‘सिटिंग-गेटिंग’ फॉर्मूले के संकेत देकर 47 विधायकों को राहत दी है। भाजपा की रणनीति में राज्य के सभी आठ सांसदों की भूमिका भी अहम होगी। लोकसभा के पांच और राज्यसभा के तीन सांसदों को मौजूदा विधानसभा सीटों को सुरक्षित रखने के साथ ही पार्टी की सीट संख्या बढ़ाने का लक्ष्य दिया गया है। उत्तराखंड के पांचों लोकसभा क्षेत्रों में 14-14 विधानसभा सीटें आती हैं। ऐसे में सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन और विधायकों के साथ समन्वय मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। हाल में दिल्ली में हुई भाजपा प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल और भरोसा बढ़ाने पर मंथन हुआ। पार्टी की कोशिश विपक्ष, खासकर कांग्रेस की ओर से भाजपा में गुटीय खींचतान को लेकर बनाए जा रहे नैरेटिव को कमजोर करने की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लोकसभा क्षेत्रवार सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। 

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। सोमवार शाम से शुरू हुई मूसलाधार बारिश मंगलवार सुबह तक जारी रही। पहाड़ से मैदान तक भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर जलभराव और भूस्खलन से सड़कें बाधित हुईं, जबकि नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से खतरा पैदा हो गया है। बारिश की तीव्रता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नरेंद्रनगर में रातभर में 260 मिमी और ऋषिकेश में 225 मिमी वर्षा दर्ज की गई। देहरादून के कई इलाकों में करीब 130 मिमी बारिश हुई। कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में भी 70 से 100 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में जगह-जगह भूस्खलन हुआ और कई मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई। निचले इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मौसम विभाग ने बुधवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारों का पूर्वानुमान जारी किया है। देहरादून और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश, अत्यंत तीव्र वर्षा और आकाशीय बिजली की आशंका है। वहीं पौड़ी, चंपावत, टिहरी, हरिद्वार, पिथौरागढ़, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन जिलों में भी भारी बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

देहरादून। उत्तराखंड में खेल प्रतिभाओं को नई पहचान और बड़ा मंच देने के लिए खेल महाकुंभ मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी का आयोजन एक सितंबर से शुरू होगा। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने आयोजन की विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है। करीब दो महीने चलने वाला यह खेल महोत्सव 30 अक्टूबर तक चलेगा। खेल महाकुंभ की शुरुआत न्याय पंचायत स्तर से होगी और प्रतियोगिताएं आगे बढ़ते हुए विधानसभा क्षेत्र, संसदीय क्षेत्र और राज्य स्तर तक पहुंचेंगी। विभिन्न आयु वर्गों के साथ महिला और दिव्यांगजन वर्ग में भी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार न्याय पंचायत स्तर की स्थानीय जनप्रतिनिधि खेलकूद प्रतियोगिताएं एक से 10 सितंबर तक होंगी। इनमें अंडर-14 और अंडर-19 बालक-बालिका वर्ग के लिए कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो और मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी। इसके बाद 21 से 30 सितंबर तक संसदीय क्षेत्र स्तर पर सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी आयोजित होगी। इसमें मलखंब, रस्साकसी, गोली (कंचा), फुटबाल और बैडमिंटन जैसी प्रतियोगिताएं शामिल होंगी। कुछ स्पर्धाओं में विधानसभा क्षेत्र स्तर से चयनित खिलाड़ी हिस्सा लेंगे, जबकि कुछ प्रतियोगिताएं सीधे आयोजित की जाएंगी। वहीं राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी की प्रतियोगिताएं 10 सितंबर से 30 अक्टूबर तक चलेंगी। विभाग का उद्देश्य प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं में खेल भावना विकसित करने के साथ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना है।

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