Sep 13, 2026 Login

AWAAZ KHULASA KUNTL:प्रश्नपत्र कुछ और कहता है मार्कशीट कुछ और! 5 अंको के प्रश्न में 5.5 अंक देने वाली यूनिवर्सिटी !

AWAAZ KHULASA KUNTL: Question Paper Says One Thing, Marksheet Says Another! University Awards 5.5 Marks for a 5-Mark Question!

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र की उत्तरपुस्तिका को लेकर चल रहे विवाद में अब विश्वविद्यालय की ओर से आरटीआई के तहत दिए गए जवाब में ही गंभीर विरोधाभास सामने आया है। संबंधित दस्तावेजों के अनुसार THE ART AND ESSENTIALS OF ANCHORING प्रश्नपत्र के पेपर कोड को लेकर प्रश्नपत्र, मार्कशीट और विश्वविद्यालय के आरटीआई जवाब में अलग-अलग स्थिति सामने आ रही है।

छात्र ने आरटीआई के माध्यम से अपनी उत्तरपुस्तिका की छायाप्रति मांगी थी। विश्वविद्यालय ने 09 सितंबर 2026 को दिए जवाब में कहा कि छात्र ने आरटीआई में THE ART AND ESSENTIALS OF ANCHORING का पेपर कोड-660234002 दर्शाया, जिसके कारण स्टोर अनुभाग में उत्तरपुस्तिका उपलब्ध नहीं हो पायी। लेकिन दस्तावेजों के अनुसार छात्र ने यह पेपर कोड अपनी ओर से नहीं बनाया था। छात्र ने आरटीआई में पेपर कोड-660234002 इसलिए अंकित किया क्योंकि कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा जारी उसकी मार्कशीट में THE ART AND ESSENTIALS OF ANCHORING के सामने यही पेपर कोड-660234002 दर्ज था।

विश्वविद्यालय ने अपने इसी जवाब की अगली कड़ी में कहा कि मामले का प्रशासन स्तर पर संज्ञान लिया गया और M.J.M.C IV SEMESTER YEAR 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनः व्यापक निरीक्षण किया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार निरीक्षण में यह सामने आया कि छात्र ने उत्तरपुस्तिका के मुख्य पृष्ठ में  पेपर कोड-660234002 के स्थान पर पेपर कोड-5592340005 गलत अंकित किया है। जबकि छात्र के पास उपलब्ध संबंधित मूल प्रश्नपत्र में THE ART AND ESSENTIALS OF ANCHORING का पेपर कोड-5592340005 स्पष्ट रूप से दर्ज है।

जबकि यह प्रश्नपत्र स्वयं कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया था। अर्थात प्रश्नपत्र में विश्वविद्यालय ने पेपर कोड-5592340005 अंकित किया था और छात्र ने उसी प्रश्नपत्र के आधार पर अपनी उत्तरपुस्तिका में पेपर कोड-5592340005 लिखा। दूसरी ओर, बाद में विश्वविद्यालय द्वारा जारी मार्कशीट में इसी प्रश्नपत्र के सामने पेपर कोड-660234002 दर्ज कर दिया गया। इसके बाद जब छात्र ने मार्कशीट में विश्वविद्यालय द्वारा दर्ज पेपर कोड-660234002 को आधार बनाकर अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति मांगी तो विश्वविद्यालय ने आरटीआई जवाब में इसी कोड को गलत बताते हुए कहा कि इसके कारण स्टोर अनुभाग में उत्तरपुस्तिका उपलब्ध नहीं हो पायी।

छात्र ने नहीं, विश्वविद्यालय ने दर्ज किया था पेपर कोड-660234002

दस्तावेजों के इस क्रम में सबसे अहम सवाल यही है कि जिस पेपर कोड-660234002 को विश्वविद्यालय आरटीआई में छात्र द्वारा गलत दर्शाया गया पेपर कोड बता रहा है, वह पेपर कोड छात्र ने स्वयं तैयार नहीं किया था, बल्कि कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा जारी मार्कशीट में दर्ज था। वहीं जिस पेपर कोड-5592340005 को विश्वविद्यालय उत्तरपुस्तिका पर गलत अंकित किया गया बता रहा है, वही पेपर कोड विश्वविद्यालय द्वारा जारी मूल प्रश्नपत्र में दर्ज था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रश्नपत्र में पेपर कोड 5592340005 था और छात्र ने उत्तरपुस्तिका में भी यही कोड दर्ज किया, तो इसे गलत कैसे माना गया? और यदि मार्कशीट में विश्वविद्यालय ने 660234002 दर्ज किया था तो उसी मार्कशीट के आधार पर आरटीआई में छात्र द्वारा यह कोड लिखे जाने को छात्र की गलती कैसे माना गया?

पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार समझा जाए तो :

विश्वविद्यालय की पहली बात: छात्र ने RTI में पेपर कोड-660234002 लिखा, इसलिए उत्तरपुस्तिका नहीं मिली। लेकिन छात्र ने RTI में पेपर कोड-660234002 अपनी तरफ से नहीं बनाया था। छात्र ने यह कोड अपनी मार्कशीट से लिया था, जिसे खुद कुमाऊँ विश्वविद्यालय ने जारी किया था। अक्सर छात्र परीक्षाओं के बाद प्रश्नपत्र जूनियर विद्यार्थियों को सैम्पल के तौर पर दे देते हैं,इसीलिए आरटीआई लगाते वक्त इस छात्र ने पेपर कोड मार्कशीट से ही देखकर लिखा। बाद में छात्र ने अपने प्रश्नपत्र को देखा तो उसमें पेपर कोड वही था जो उत्तरपुस्तिका में लिखा हुआ था।

विश्वविद्यालय की दूसरी बात:

उत्तरपुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर पेपर कोड-660234002 के स्थान पर पेपर कोड-5592340005 गलत अंकित किया गया। लेकिन छात्र के पास मौजूद मूल प्रश्नपत्र में विश्वविद्यालय ने खुद पेपर कोड-5592340005 अंकित किया था। यानी छात्र ने उत्तरपुस्तिका पर वही पेपर कोड-5592340005 लिखा जो प्रश्नपत्र पर विश्वविद्यालय ने दिया था। बाद में विश्वविद्यालय की मार्कशीट में उसी पेपर के सामने पेपर कोड- 660234002 अंकित किया गया।

इसलिए छात्र ने RTI में मार्कशीट में विश्वविद्यालय द्वारा दर्ज पेपर कोड-660234002 के आधार पर उत्तरपुस्तिका मांगी।

अब विश्वविद्यालय उसी पेपर कोड-660234002 को RTI में लिखे जाने को छात्र की गलती बता रहा है।

खबर प्रकाशित होने के बाद मिली उत्तरपुस्तिका

मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। छात्र द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर आवाज़ इंडिया ने 08 सितंबर 2026 को मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

इसके बाद 10 सितंबर 2026 की सुबह दैनिक समाचार पत्र में खबर प्रकाशित हुई, जिसमें कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से सफाई देते हुए कहा गया कि ‘‘कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ढूंढ निकाली छात्र की उत्तर पुस्तिका’’। खबर में कुल सचिव प्रोफेसर रजनीश पांडे के निर्देश पर परीक्षा और आरटीआई विभाग के रिकॉर्ड्स का गहन मिलान किए जाने तथा छात्र की उत्तर पुस्तिकाएं सुरक्षित मिल जाने और कुलसचिव के हवाले से छात्र को उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त हो जाने की बात भी कही गई। हालांकि छात्र ने दैनिक समाचार पत्र की खबर का खंडन करते हुए आवाज़ इंडिया को बताया कि उसे उस समय तक उत्तरपुस्तिका प्राप्त नहीं हुई थी।

छात्र के बयान,उपलब्ध दस्तावेजों और घटनाक्रम का अध्ययन करने के बाद आवाज़ इंडिया ने 10 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 09 मिनट पर वेब पोर्टल पर खबर प्रकाशित की। जिसके बाद उसी दिन छात्र को उत्तरपुस्तिका भेजने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से भारतीय डाक में दोपहर 02 बजकर 07 मिनट पर पार्सल बुक किया गया। इसकी जानकारी indiapost.gov.in पर उपलब्ध डाक रिकॉर्ड से देखी जा सकती है। 

इस घटनाक्रम से भी सवाल खड़ा होता है कि यदि 10 सितंबर की सुबह दैनिक समाचार पत्र की प्रकाशित खबर में छात्र को उत्तरपुस्तिका मिल जाने की बात कही जा रही थी लेकिन उसी दिन दोपहर 02 बजकर 07 मिनट पर छात्र को उत्तरपुस्तिका भेजने के लिए कुमाऊँ यूनिवर्सिटी द्वारा पार्सल बुक किया गया जबकि कुमाऊँ यूनिवर्सिटी का दैनिक समाचार पत्र में बयान एक दिन पूर्व दिया गया था और वो छप चुका था, ऐसे में एकतरफा खबर का एक दिन पूर्व प्रकाशन करना कहीं न कहीं दैनिक समाचार पत्र और कुमाऊँ यूनिवर्सिटी की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े करता है ।

पांच अंक के सवाल पर साढ़े पांच अंक!

उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन से जुड़ा एक और तथ्य भी सामने आया है। उपलब्ध उत्तरपुस्तिका में जिस प्रश्न के लिए पांच अंक निर्धारित किए गए थे, उसके सामने परीक्षक द्वारा साढ़े पांच अंक 5.1/2 दर्ज किए गए दिखाई दे रहे हैं। जो की एक मूल्यांकन त्रुटि है ।

उत्तरपुस्तिका, प्रश्नपत्र, मार्कशीट और आरटीआई जवाब में सामने आए इन तथ्यों के बाद अब सवाल केवल उत्तरपुस्तिका मिलने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि पेपर कोड को लेकर विश्वविद्यालय के अलग-अलग दस्तावेजों में विरोधाभास क्यों है और जिस कोड को विश्वविद्यालय ने अपनी मार्कशीट में दर्ज किया, उसी को आरटीआई में लिखे जाने की जिम्मेदारी छात्र पर क्यों डाली गई ? छात्र को झूठा साबित करने के लिए एक दिन पहले ही दैनिक समाचार पत्र में बिना आधार के एकतरफा खबर का प्रकाशन करा दिया गया जो कि स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए सबसे घातक स्थिति है ।